लखनऊ। माह-ए-इबादत रमज़ान, चांद का दीदार होते ही शुरू हो गया। घरों व मस्जिदों में नमाज़ व नमाज़-ए-तरावीह शुरू हो गई। रमज़ान-उल-मुबारक को देखते हुए मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में चहलकदमी बढ़नी शुरू हो गई। सोमवार देर शाम चांद दिखते ही बाजारों में रोजेदारों की भीड़ एकाएक शाम को बढ़ गई। जिससे कि बाजारों की अच्छी खासी रौनक दिखी।
रमज़ान-उल-मुबारक का चांद नजर आ गया। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक शाबान महीने के बाद पड़ने वाला महीना रमज़ान-उल-मुबारक का महीना मुसलमानों का बड़ी ही रहमत और बरकत वाला महीना है। जोकि सोमवार की शाम को चांद दिखते ही शुरू हो गया। चांद के दीदार के साथ मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ पढ़ी जाने लगी। वोट पड़ने के बाद शाम होते ही लोगों की निगाहें रमज़ान का चांद देखने के लिए बेताब रही। बड़े बूढ़े व बच्चे हर कोई चांद के दीदार के लिए बेताब सा दिखा। चांद निकलते ही जहां घरों व मस्जिदों में इबादत शुरू हो गई। रोज़े को देखते हुए बाजारों में इफ्तार व सेहरी के लिए सेवई, सूतफेनी, चिप्स कचरी व फलों की खरीदारी भी बढ़ गई।
15 घंटे से ज्यादा समय तक रहेंगे रोज़े
रमज़ान-उल-मुबारक का चांद नजर आते ही रोज़े शुरू हो गए है। भीषण तपिश के बीच रोज़ेदारों को इस बार 15 घंटे से उपर तक भूख और प्यास बर्दाश्त करना पड़ेगा। लोगों के मुताबिक आखिरी रोज़ा सबसे ज्यादा वक्त का होगा।

No comments:
Post a Comment