नई दिल्ली। UNESCO की धरोहर पाकिस्तानी ग़ज़ल और कव्वाली गायक नुसरत फतह अली खान को ‘किंग ऑफ कव्वाली’ भी कहा जाता है. नुसरत फतह अली खान की गायिकी की रेंज को आज भी दुनिया में सबसे उम्दा माना जाता है.
कव्वाली को पश्चिमी दुनिया तक ले जाने का श्रेय भी नुसरत साहब को ही जाता है. नुसरत फतह अली खान का जन्म पाकिस्तान के फैसलाबाद में सन 1948 हुआ था. उनके परिवार में कव्वाली की परंपरा पिछले 600 वर्षों से चली आ रही है.
नुसरत फतह अली खान को सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि भारत में भी बेशुमार प्यार मिला. नुसरत ने कुछ बॉलीवुड फिल्मों के लिए भी म्यूजिक कंपोज किया था. उन्हें भारत पाकिस्तान के अलावा पूरी दुनिया में भी जबरदस्त प्यार और प्रशंसा मिली. जापान में तो उन्हें सिंगिंग बुद्धा के नाम से जाना जाता था.
नुसरत फतह अली खान साहब को याद करते हुए पेश है उनकी वो गीत जो भी लाखों दिलों पर राज करते हैं.
1-अलिफ अल्लाह चंबे दी बूटी
ये पंजाबी फॉक सॉन्ग वैसे तो कई गायकों ने अपने अपने अंदाज में गाया है लेकिन नुसरहत फतह अली खान द्वारा गाई गई कव्वाली को इन सबके बीच सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.
2-तुम्हे दिल्लगी
ये कव्वाली के सबसे मशहूर गीतों में से एक है. इसे नुसरत फतह अली खान के भतीजे राहत फतह अली खान भी गा चुके हैं. राहद द्वारा गाए गया गाना विद्युत जामवाल और हुमै कुरैशी पर फिल्माया गया था.
3-सांसों की माला
इसे 16 सदी में कृष्ण भक्त मीरा ने लिखा था. जिन्हें मीरा बाई के नाम से भी जाना जाता था. नुसरत फतह अली खान जब भारत आए थे तो उन्होंने ये गीत गाया था.
4-सानू एक पल ना चैन
इसे नुसरत के सिग्नेचर गीतों में से एक माना जाता है. इसे राहत और अातीफ असलम जैसे आर्टिस्ट भी अपनी आवाज में गा चुके हैं.
5- ये जो हल्का हल्का सुरूर है
ये नुसरत साहब द्वारा गाई गई सबसे मशहूर कव्वालियों में से एक और इसे सबसे ज्यादा बार गाया गया है.
6-मेरा पिया घर आया
इसे पंजाबी सूफी कवि बुल्ले शाह ने लिखा था. इसे नुसरत साहब के अलावा कई गायक अपने अपने अंदाज में गा चुके हैं.
7-मेरे रश्क-ए कमर
ये भी नुसरत फतह अली खान के सबसे मशहूर गानों में से एक है. हाल ही में इस गीत का इस्तेमाल बादशाहो में भी किया गया था.
8-आफरीन-आफरीन
इस गीत पर पहली बार नुसरत फतह अली खान और जावेद अख्तर ने साथ काम किया था.इसे अभी भी नुसरत फतह अली खान की सबसे शानदार कव्वालियों में से एक माना जाता है.
9-तुम एक गोरखधंधा हो
तुम एक गोरखधंधा हो एक सूफी कहावत है. इसे गजल की शक्ल में पाकिस्तानी गीतकार नाज ख्यालवी ने लिखा था जिसे उस्ताद नुसरत फतह अली खान ने गाया था.
10-तू मेरा दिल तू मेरी जान
UNESCO की धरोहर नुसरत साहब द्वारा गाई गई सबसे मशहूर कव्वालियों में से एक है.
-एजेंसी
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