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Friday, 8 December 2017

MAX Hospital शालीमार बाग का लाइसेंस रद्द

नवजात बच्चे को मरा हुआ बताने पर हुई MAX Hospital  पर कार्यवाही

नई दिल्ली। आज दिल्‍ली सरकार ने शालीबाग के MAX Hospital पर बडी़ कार्रवाई करते हुए लाइसेंस कैसिल कर दिया है।

दिल्ली सरकार ने एक्शन लेते हुए नवजात बच्चे को मरा हुआ बताकर उसके परिजनों को सौंपने वाले MAX Hospital का लाइसेंस कैसिल कर दिया है।

इस बात की जानकारी देते हुए दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने बताया कि ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौरतलब है कि नवजात बच्चे को मरा हुआ बताने के मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से अस्पताल प्रशासन को नोटिस दिया गया था। इसके अलावा, इस मामले में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने भी नोटिस जारी किया था। हालांकि, सत्येन्द्र जैन ने इससे पहले ही बता दिया था कि प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ गलतियां पाई गयी थी।

प्राथमिक रिपोर्ट में क्या कहा था सत्येन्द्र जैन?

30 नवंबर से वेंटिलेटर पर था नवजात जिसकी बुधवार को मौत हो गई। प्राथमिक रिपोर्ट में सत्येन्द्र जैन ने बताया था कि अस्पताल ने बच्चे की ईसीजी नहीं कि जिससे यह पता चलता कि बच्चे की मौत हुई है या नहीं।

इसके अलावा, बिना लिखित निर्देश के बच्चे को मां-बाप को सौंपा गया था। साथ ही, जिंदा और मृत बच्चे को अलग-अलग नहीं रखा था।
दिल्ली सरकार ने इस आपराधिक लापरवाही की जांच के आदेश दिए थे। इसके अलावा, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने MAX Hospital पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी।

बता दें कि एक दिन पूर्व ही 22 हफ़्ते के जिंदा नवजात को मृत बताकर माता-पिता को सौंपने के मामले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन मैक्स अस्पताल और डॉक्टरों के पक्ष में आकर खड़ा हो गया था. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने बयान जारी करके कहा था कि ‘समय से पहले होने वाली ऐसी डिलीवरी के लिए कोई प्रोटोकॉल या गाइडलाइंस नहीं है. लेकिन भारत का कानून 20 हफ़्ते तक गर्भपात की इजाज़त देता है और कुछ ज़्यादा गंभीर मामलों में 24 हफ़्ते में गर्भपात की इजाज़त अदालत ने दी है यानी भारतीय कानून भी 24 हफ्ते तक के भ्रूण को ज़िंदा ना बचने लायक मानता है.’

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन दरअसल डॉक्टरों की संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की दिल्ली यूनिट है. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि ‘समय से पहले होने वाली दिल्ली के एक अस्पताल में डिलीवरी के हाल के विवाद में हम कहना चाहते हैं कि 24 हफ्ते से कम के भ्रूण के बचने की उम्मीद नहीं होती. कई बार hypothermia के चलते दिल की धड़कन नहीं पता चल पाती या लौट आती है. ऐसे कुछ गिने चुने मामले दुनिया मे कई जगह सामने आए जिसमें जून का सफदरजंग का मामला भी शामिल है.’
-एजेंसी

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