हरदोई।19फरवरी समीर सिंह को अयोग्य ठहराए जाने की याचिका को हाईकोर्ट ने नहीं माना सुनवाई योग्य धर्मेन्द्र ने समीर सहित आधा दर्जन बीडीसी सदस्यों की सदस्यता की वैधता पर उठाया था सवाल बावन ब्लॉक प्रमुख धर्मेन्द्र सिंह के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान को लेकर छाया कुहासा उच्च न्यायालय के निर्णय से छंट गया है। अविश्वास प्रस्ताव की अगुवाई कर रहे भाजपा नेता समीर सिंह द्वारा ब्लॉक डेवलपमेन्ट काउन्सिल के सदस्य पद की सदस्यता नहीं लेने के आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराने का धर्मेन्द्र का दांव काम नहीं आया। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने धर्मेन्द्र की याचिका सुनवाई योग्य नहीं माना। न्यायालय के निर्णय से समीर सिंह खेमे में लड्डू बंट रहे हैं।दरअसल, समीर सिंह ने बावन ब्लॉक प्रमुख धर्मेन्द्र सिंह के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए डीएम के सामने 66 बीडीसी सदस्यों की परेड कराई थी। शपथ पत्रों के सत्यापन के बाद जिला प्रशासन ने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए 21 फ़रवरी तय की थी। उससे पहले धर्मेन्द्र हाईकोर्ट चले गए। उन्होंने अपनी अपील में कहा था, समीर सिंह सहित आधा दर्जन बीडीसी सदस्यों ने सदन की सदस्यता की ना तो शपथ ली और ना ही बैठकों में शामिल होते हैं। धर्मेन्द्र ने इन सभी को सदन का सदस्य नहीं मानने और अविश्वास प्रस्ताव लाने के योग्य नहीं मानने की दलील दी थी।धर्मेन्द्र की अपील पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को स्टैण्डिंग काउन्सिल में जवाब देने को कहा था। इसके बाद जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय द्वारा तैयार जवाब में बावन ब्लॉक डेवलपमेन्ट काउन्सिल में सदस्य का कोई भी पद रिक्त नहीं होने की बात कही। जिला प्रशासन द्वारा जवाब स्टैण्डिंग काउन्सिल में प्रस्तुत करने के बाद आज हाईकोर्ट की डबल बेंच की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति के0के0 अरोड़ा के सामने समीर की तरफ़ से वरिष्ठ अधिवक्ता ओ0पी0 श्रीवास्तव की अगुवाई में छः अधिवक्ता पूरी तैयारी से प्रस्तुत हुए और मजबूती से दलील रखी। तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने धर्मेन्द्र की अपील को सुनवाई योग्य मानने से इंकार कर दिया।हाईकोर्ट के फ़ैसले पर समीर सिंह ने कहा, यह सत्य और न्याय की जीत है और 21 फ़रवरी को भी यह साबित होगा।
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Monday, 19 February 2018
21 को बावन प्रमुख धर्मेन्द सिंह के भाग्य का फैसला
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