अगर आप कोई नया कार्य आरम्भ करने जा रहे हैं या आपने कोई नया मकान लिया है तो वह आपके लिए बहुत अधिक महत्व रखता है. अपने नए मकान में कदम रखने से पहले मंगल कामना की जाती है. ऐसे ही जब कोई नया कार्य आरम्भ किया जाता है तब भी भगवान् से प्रार्थना की जाती है की उसे तरक्की मिले और ईश्वर सदैव उसके साथ रहे.
तो जब भी कोई नया कार्य किया जाये या नए घर में प्रवेश किया जाए तब भगवान की पूजा आराधना किया जाता है ऐसा हिन्दू धर्म में विधान है.नए घर में प्रवेश हो तो सर्वप्रथम घर में मंगल कलश स्थापना और वास्तु स्थापना की जाती है. ऐसे ही यदि आप कोई नया कार्य आरम्भ करते हैं तो सबसे पहले आप अक्षत लें उसमे कुमकुम मिलाएं और फिर उसे उस पाटे के नीचे बिखरा दें जिस पर भगवान् की स्थापना करनी हो.
अब उस पर पाटे को रख कर उसपर एक साफ़ वस्त्र रखें. अब वस्त्र पर गेंहू के छोटे छोटे पर्वत बना लें, फिर नवग्रह और विभिन्न देवी देवताओं के तौर पर सुपारियों की स्थापना उस पर करें. अब पाटे पर एक कौने में एक लौटे में शुद्ध जल भर कर उसमे आम के पत्ते रखे और उसे एक साफ़ थाल से ढँक दें. अब थाल में एक साफ़ वस्त्र बिछा दें और उसमे अक्षत रख कर उस पर भगवान् सत्यनारायण को रख के उनका पूजन करें.
पटे पर सबसे प्रमुखता से श्री गणेश जी का पूजन करें और फिर सभ देवी देवताओं का पूजन करें. पूजन के लिए आप मुहूर्त दिखवा लें तो अच्छा है. राहुकाल में पूजन निषेध माना जाता है. पूजन के लिए शुभ लाभ अमृत को अच्छा माना जाता है. पूजन के दौरान एक एक देवता का आह्वान कर उनके निमित्त रखी गई सामग्री केवल उन्हें ही अर्पित करें.
पूजन के अंत में भोग लगाऐं और आरती करें. इसके बाद कपूर की आरती करें और सभी को आरती देकर आरती की थाल के साईड में पानी छोड़कर उसे ठंडा करें. साथ ही भगवान से सुख समृद्धि की कामना करें.

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