बीजिंग। चीन ने इस शिप को पिछले साल अप्रैल में ही लॉन्च किया था। इसके सिस्टम को अपडेट करने और हथियारों की फिटिंग की वजह से अब तक सेवा में नहीं लिया गया है। शिप को अभी तक कोई स्थाई नाम भी नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि इस एयरक्राफ्ट के नौसेना से जुड़ने के बाद चीन की समुद्री ताकत में इजाफा होगा। चीन ने रविवार को देश में बने पहले एयरक्राफ्ट कैरियर का समुद्री परीक्षण शुरू किया है।
देश का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर डालियान शिपयार्ड डॉक से अपने पहले समुद्री परीक्षण पर निकल चुका है। इस ट्रायल का मकसद जहाज की विश्वसनीयता और स्थिरता का निरीक्षण करना है।
चीन के पास अब दो एयरक्राफ्ट कैरियर
इससे पहले चीन के पास एक और एयरक्राफ्ट कैरियर लायोनिंग भी है। रूस का बना ये कैरियर चीन को 2012 में मिला था। इसे एक ट्रेनिंग और रिसर्च के लिए बना जहाज माना जाता है।
नौसेना को लायोनिंग की सेवा मिलने के बाद चीन ने 2013 में ही स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाना शुरू कर दिया था। नए कैरियर को अभी तक कोई स्थाई नाम नहीं दिया गया है। कोड नेम 001A के नाम से जाना जाता है। माना जा रहा है कि नया एयरक्राफ्ट कैरियर 2020 से नौसेना में अपनी सेवाएं देना शुरू कर देगा।
अब तक गुप्त रहा है चीन का एयरक्राफ्ट कैरियर प्रोग्राम
चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर प्रोग्राम के बारे में अभी तक काफी कम जानकारी ही सामने आ पाई है। बताया जाता है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद ही प्रोजेक्ट पर नजर रख रहे हैं ताकि चीन की सेना को दुनिया के सामने आधुनिक बनाया जा सके। इस प्रोजेक्ट के तहत अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और एंटी-सैटेलाइट मिसाइलें भी बनाईं जा रही है। चीन लंबे समय से दक्षिण चीन सागर पर अधिकार जताने के लिए इस तरह के प्रयोग कर रहा है।
अमेरिका के मुकाबले पुरानी तकनीक के हैं चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नया एयरक्राफ्ट कैरियर चीन की ताकत को कई गुना ज्यादा बढ़ा देगा। उन्होंने ये भी दावा किया कि चीन की तकनीक अमेरिकी नौसेना के मुकाबले काफी पिछड़ी और कमतर है।


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