सीतापुर। सीतापुर,खैराबाद के आसपास ग्रामीण क्षेत्र में आदमखोर कुत्तो का आतंक बदस्तूर जारी है। कुत्तो के हमलो में अभी तक तेरह मौते हो चुकी है व कई मासूम गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। कई मासूमो की मौत के बाद जागी सरकार के मुख्यमंत्री तक को आने पर मजबूर होना पडा। बावजूद इसके प्रशासन अभी तक आदमखोर कुत्तों को पकडने को लेकर केई ठोस रणनीत नही बना सका। तो वही सबकुछ सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है। परिणामस्वरूप आये दिन मासूम कुत्तो का निवाला बन रहे है। बीते दिनों खैराबाद इलाके के गुरपलिया गांव में हुई बच्चो की मौत व कई घायलो के बाद घटनाओं की समीक्षा करने पहुंचे आईजी सुजीत पांडे ने प्रभावित क्षेत्रो में ड्रोन कैमरे लगवाकर आदमखोर कुत्तो पर निगरानी करने की बात कही थी,परन्तु एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद प्रभावित क्षेत्र में अभी तक कहीं ड्रोन कैमरो के दर्शन ग्रामीणो को नही हो सके। रविवार को भी महेशपुर चिलवारा में आदमखोर कुत्तो ने एक बालिका को निवाला बना डाला लेकिन प्रशासन ढाक के तीन पात है। डीएफओ के मुताबिक आदमखोर कुत्तो की निगरानी में पांच-पांच कर्मचारियो की आठ टीमें लगाई लगायी गयी है जिसमे चालीस लोग लगभग अडतीस गांवो की पर नजर रखे है। बावजूद इसके कुत्तो के भय से ग्रामीणो में दहसत का माहौल व्याप्त है।
आदमखोर कुत्तो की परछाई तक नही पा रही वन विभाग की टीम
सीतापुर। आदमखोर कुत्तो को पकडने में लगााई गयी वन विभाग की टीम सिर्फ हवा में तीर चला रही है। महज आधा घंटे तक गांवो में खानापूर्ति कर घुमंतू कुत्तो की पकड दिखाकर वन विभाग की टीम अपने कतृव्यो से इति श्री करने में जुटी है। अभी तक टीम एक भी आदमखोर कुत्ते की शिनाख्त तक नही कर सकी।
किधर से आते है और किधर निकल जाते है आतंक के पर्याय बन चुके कुत्ते
सीतापुर। तमाम मौतो के बाद कुत्तो को पकडने में नाकाम प्रशासन अभी तक यह पता लगा पाने में असमर्थ है कि कुत्तो का प्रकार क्या है और उनका असल ठिकाना कहां है। ये आदमखोर कुत्ते कहां से आते है और किधर निकल जाते हैं सिर्फ अटकलो तक ही सीमित हैं। देखना है प्रशासन असल कुत्तो तक कब पहुंचेगा।

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