लखनऊ। राजकीय सम्प्रेषण गृह में स्वेच्छा से कार्य करने वाले किशोरों मानदेय देने की व्यवस्था की जाये। यह निर्देश मंगलवार को राजकीय सम्प्रेषण गृह (किशोर) राजकीय बाल गृह (बालक) और राजकीय बालगृह (विशेषीकृत) के निरीक्षण के दौरान दी। निरीक्षण के दौरान डीएम के साथ एडीएम टीजी, डिप्टी सीपीओ और डीपीओ उपस्थित थे। मालूम हो कि वर्तमान समय में राजकीय सम्प्रेषण गृह में 3 उन्नाव, लखनऊ व सीतापुर को मिलाकर कुल 76 बच्चे हैं। डीएम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि सम्पे्रषण गृह में स्वेच्छा से कार्य करने वाले किशोरों को कोई भी मानदेय नहीं दिया जाता है। जिस पर तत्काल ही डीएम ने मानदेय की व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये।
उन्होंने परिसर की साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। संस्थान प्रति बच्चा 7 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च करता है। संस्थान में एलईडी लाइट की रिपेयरिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके बच्चों के मानदेय की व्यवस्था के लिए जिलाधिकारी ने नगर निगम की खराब लाइटों को बच्चों से रिपेयर करने का प्रस्ताव दिया जिससे उनको मानदेय की प्राप्ति हो सके। संस्थान द्वारा अवगत कराया गया कि संस्थान में कोई भी शिक्षक नही है। जिसका निस्तारण करते हुए संस्थान में तत्काल प्रभाव से शिक्षक को नियुक्त करने का आदेश जिलाधिकारी ने दिये।
साथ ही जिन बच्चों की सुनवाई अभी तक रुकी हुई है। उनकी सुनवाई जल्दी कराने का आश्वासन दिया। इसी क्रम में राजकीय बाल गृह (बालक) में वर्तमान समय में कुल 65 बच्चे है। इस संस्थान में खोये हुए और ऐसे बच्चे हैं जिनके परिवार अभिभावक नहीं हैं। यहां बच्चों को सिलाई व कुर्सी बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिलाधिकारी ने सरकारी विभागों की कुर्सियां बनाने का कार्य उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने बताया कि यहां पर संस्थान में स्मार्ट क्लास बनाने का प्रस्ताव भी पास हो चुका है। इसके अलावा राजकीय बालगृह (विशेषीकृत) में वर्तमान समय में 64 बच्चे हैं। जिसमें मुख्य रूप से मानसिक विकृत बच्चे हैं।
क्राइम समाचार


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