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Wednesday, 16 May 2018

आंधी से गिरे पेड़, आज यूपी में तूफान-बारिश की चेतावनी…


नई दिल्ली। जींद, रोहतक, पानीपत, अलवर, बागपत, मेरठ और अलीगढ़ के लिए यह चेतावनी जारी की गई है। इससे पहले शनिवार शाम को आए तूफान ने देश के उत्तर से लेकर दक्षिणी और पूर्व से लेकर पश्चिमी हिस्सों में तबाही मचाई थी। इससे हुए हादसों में छह राज्यों में 70 लोग मारे गए थे। सबसे ज्यादा 51 मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं थीं। यहां बुधवार तड़के हल्की बारिश हुई और धूलभरी आंधी चली, जिससे कई पेड़ गिर गए। मौसम विभाग ने आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के 6 जिलों में हल्की बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की है।

14 दिन पहले (3 मई) उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड और पंजाब में इसी तरह का आंधी-तूफान आया था। तब 134 लोगों की मौत हो गई थी 400 से अधिक घायल हुए थे। उस समय भी सबसे ज्यादा तबाही उत्तर प्रदेश में मची थी। तब उत्तर प्रदेश में 80 लोगों की मौत हुई थी। इसमें सबसे ज्यादा आगारा जिलें में लोगों की जानें गईं थीं। इसके बाद 9 मई को उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज आंधी आई थी जिसके कारण 18 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 27 घायल हुए थे।

मौसम विशेषज्ञ एसके नायक ने बताया कि हरियाणा से लेकर उत्तर मध्य महाराष्ट्र तक एक नार्थ-साउथ ट्रफ लाइन बनी है। यह भोपाल सहित मध्य प्रदशे के पश्चिमी हिस्से से होकर गुजर रही है। हरियाणा से लेकर नागालैंड तक एक आैर ईस्ट-वेस्ट ट्रफ लाइन बनी है। इनकी वजह से बारिश, गरज-चमक के साथ तेज हवा, ओलावृष्टि और बारिश के आसार हैं।

उत्तर भारत में आए आंधी-तूफान और दक्षिण भारत में बढ़ते तापमान की वजह से इस बार मानसून 4-5 दिन पहले दस्तक दे सकता है। बारिश भी अच्छी होगी। एग्रोमीट्रियोलॉजिस्ट डॉ. रामचंद्र साबले ने भास्कर को बताया कि डस्ट स्टॉर्म (धूल भरी आंधी) हर साल होने वाली प्रक्रिया है। यह एक प्री मानसून एक्टिविटी है। इस साल अरब सागर से आने वाली गर्म हवा राजस्थान से पूर्व की ओर तेज रफ्तार से बहने लगी, उसी समय उत्तर-पश्चिम में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस मौजूद होने से आंधी तूफान का असर बढ़ गया।

उत्तर भारत में हवा का दबाव 1000 से 1002 हेप्टा पास्कल (हवा के दाब की यूनिट) रहा, इस वजह से चक्रवात को बढ़ावा मिला। दक्षिण भारत में भी लू जैसी स्थिति हो गई। इसका मतलब है की मानसून इस साल भारत में जल्द दस्तक देने की तैयारी में है। ऐसे ही हालात रहे तो मानसून 25 मई को केरल में पहुंच सकता है। आमतौर पर केरल में 1 जून तक मानसून आता है।

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