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Thursday, 21 June 2018

रामकृष्ण मठ में मनाया गया अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

—माह भर से अनवरत चल रहे योग शिविर का हुआ समापन।
—रामकृष्ण मिशन अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज के दिशानिर्देश पर माह भर योग शिक्षक दिनेश कुमार मौर्या ने सिखाया योग।
—स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने योग को समग्र विकास का मूल बताया।


लखनऊ। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम मेँ बृहस्पतिवार को मनाया गया। इसी के साथ माह भर से चल रहे योग शिविर का समापन हो गया।
विगत एक माह से रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, लखनऊ द्वारा योग शिविर का आयोजन रामकृष्ण मठ में आयोजित किया गयाथा। माह भर तक चले शिविर में 291 लोगो ने लगभग प्रतिदिन भाग लिया। शिविर में आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी प्रोट्रोकाल सामान्य अभ्यास क्रम मे सूक्ष्म क्रियायेँ, आसन, प्राणायाम, ध्यान व संकल्प तथा शान्ति पाठ के साथ योग शिविर का समापन हुआ। सुबह 5:45 बजे से 8:00 बजे तक लखनऊ व आस-पास से आये हुए लोगों को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान, लखनऊ द्वारा योग शिक्षक श्री दिनेश कुमार मौर्य, कुमारी संध्या यादव, विवेक पाण्डेय व उनकी टीम द्वारा निःशुल्क योग का अभ्यास कराया गया। तत्पश्चात योग शिविर में सम्मिलित हुये सभी लोगों को प्रमाण पत्र व निर्धारित सामान्य योग अभ्यास क्रम (प्रोटोकॉल) चार्ट वितरित किये गये साथ ही साथ उन्हें प्राकृतिक नाश्ते के रूप में अंकुरित मूंग व चना, दलिया, केला व छाछ भी वितरित किये गये।
समापन समारोह में रामकृष्ण मिशन के सचिव श्रीमत् स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने शिविर में आये लोगो का स्वागत किया तथा अपने भाषण में योग की विशेषतायें व महत्व पर चर्चा किया। स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने कहा कि योग के अभ्यास द्वारा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य स्वस्थ रहता है। उन्होंने अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनन्दमय शारिरिक कोषां पर प्रकाश डाला तथा यह भी बताया कि योग का उद्देश्य हमारे जीवन का समग्र विकास के माध्यम से परमात्मा से युक्त होना है। स्वामी जी ने कहा कि समग्र विकास का तात्पर्य शारीरिक, मानसिक, नैतिक, आध्यात्मिक व सामाजिक विकास से है। यह जीवन जीने की कला है। यह एक ऐसा साधना विज्ञान है जिसके द्वारा जन्म – जन्मांतर के संस्कार जागृत हो जाते हैं तथा शारीरिक एवं मानसिक निरोगता, अस्वच्छता, कुविचारो व कुसंस्कारों से मुक्ति मिलती है। जीवन उच्च व दिव्य बनता जाता है तथा आत्मदर्शन व आत्मसाक्षात्कार के द्वारा मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है।
योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी नेकहा कि महर्षि पंतजलि ने अष्टांग योग के द्वारा शरीर शुद्धि के साथ – साथ चारित्रिक शुद्धि का उपाय बताया है। योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि है। योग शिक्षक दिनेश कुमार मौर्य व उनकी टीम के प्रति लोगों ने आभार जताया।

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