सहारनपुर। भारतीय रेलवेज की साझेदारी से निर्मित एल्स्टाॅम का पहला इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैसिलिटी से निर्धारित समय से तीन दिन पहले सहारानपुर पहुंच गया। यह डिपो देश में एक सबसे आधुनिक लोकोमोटिव मेंटेनेंस इकाई के रूप में सेवायें प्रदान करेगा। इससे 800 लोकोमोटिव्स के रखरखाव में मदद मिलेगी, जिनका निर्माण मधेपुरा में किया जायेगा।
मधेपुरा से पहले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का सफर 12 जून को शुरू हुआ था और लखनऊ के रास्ते सहारनपुर पहुंचने के लिये इसने 12000 किमी तक की यात्रा की। यह कदम सख्त सुरक्षा मानकों के अंतर्गत उठाया गया है। इस मूविंग लोकोमोटिव में सवार तीन लोगों- लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट और लोको इंस्पेक्टर द्वारा माॅनिटरिंग जारी रखने के लिये लोकोमोटिव्स की रफ्तार को 60 किमी प्रति घंटे पर सीमित रखा गया। लोकोमोटिव कर्मचारियों को अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किये गये थे, ताकि वे रास्ते में लोकोमोटिव मूवमेंट पैरामीटर्स में होने वाले बदलावों के अनुसार काम कर सकें। टीसीएमएस इंजीनियरों, आवश्यक टूल्स और स्पयेर्स से युक्त एक कारवां भी पूरे रास्ते लोकोमोटिव के साथ चला। लखनऊ में टीम के सदस्यों को बदला भी गया, ताकि सभी सदस्यों को सफर के दौरान आराम भी मिल सके।
उद्योग में पहली बार लोकोमोटिव की गति को एक रिमोट माॅनिटरिंग सिस्टम ट्रेनट्रेसर के माध्यम ट्रैक किया गया। ट्रेनट्रेसर एल्स्टाॅम की एक ट्रेडमार्क टेक्नोलाॅजी है, जिसमें पहले से ही कोई खराबी और ट्रैक पर चलने के दौरान समाधन देने की भी क्षमतायें हैं।
वर्तमान में सहारनपुर डिपो को भारतीय रेलवे ट्रैक्स पर एल्स्टाॅम द्वारा अन्य परीक्षणों एवं जांच के लिये तैयार किया जा रहा है और इसकी शुरूआत जल्द ही होगी। इन परीक्षणों के बाद लोकोमोटिव की रफ्तार 120 किमी/घंटा तक बढ़ जायेगी। परीक्षण के बाद नये लोकोमोटिव को व्यावसायिक रूप से परिचालन शुरू होने से पहले 50000 किमी के एक अन्य परीक्षण से गुजारा जायेगा।
इस सहारनपुर डिपो का आधिकारिक रूप से उद्घाटन इस महीने किया जायेगा।
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Thursday, 21 June 2018
अल्स्टॉम का पहला इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव परीक्षण के लिए सहारनपुर पहुंचा
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