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Thursday, 5 July 2018

गांजर के बड़े भाग का अस्तित्व मिटा चुकी हैं गांजर की नदियां

सीतापुर।गांजर के एक बडे भूभाग पर शारदा व घाघरा नदी के द्वारा नेपाल से आने वाला पानी उसकी समृद्धि में बाधा बना हुआ है। पिछले 70 वर्षों में स्वछन्द रूप से बहती शारदा व घाघरा ने खीरी, बहराइच व सीतापुर के बीच स्थित तीनो तहसीलों की लगभग 10 हजार हेक्टेअर सोना उगलने वाली भूमि को बंजर बना दिया। लगभग दो दर्जन बसावटों को उजाड दिया। उनकी अपनी संस्कृति सभ्यता शारदा व घाघरा की कटान के साथ कट गई हजारों पेड-पौधे उखाड दिये, यह सिलसिला दोनो नदियों की तलहटी में रहने वाले लोगो में पीढी दर पीढी आज भी जारी है। इसमें जो साधन सम्पन्न लोग थे या फिर वह जो इस मैराथन में हार गये वह नदी का किनारा छोड कर और कहीं जा बसे। कटान व बाढ पीडितों में आज तक अरबों रुपये कीें राहत सामग्री बांटी जा चुकी है। जबकि बाढ व कटान से पीडित लोग आज भी आदिवासियों जैसा जीवन जी रहे हैं। जनपद खीरी के शारदा नगर के चैधरी चरण ंिसह बैराज से नेपाल का पानी शारदा नदी में छोडा जाता है। यही शारदा नदी तहसील लहरपुर के भदफर गांव के पास से सीतापुर में प्रवेश करती है थोडा आगे जाकर सोंसरी गांव के पास आर अपना प्रचंड रूप दिखाती हुई आगे बढती है। सोंसरी गांव गांजर का बहुत ही समृद्ध गांव माना जाता है जो इस समय सीधी चपेट में है। स्व0 एमआर शर्मा के संघर्ष की बदौलत इसकी सुरक्षा के लिए 11 करोड की परियोजना को शासन द्वारा मंजूरी मिल गई थी। अपनी लगभग 40 किलोमीटर यात्रा पूरी करके शारदा नदी आगे चलकर तहसील बिसवां के मल्लापुर गांव के सामने नेपाल की सरहद के पास स्थित कर्तनियाघाट के गिरिजापुरी बैराज के रास्ते आने वाली घाघरा नदी में मिल जाती हैं। दोनांे नदियों का उद्गम भले ही भारत में हो रहा हो लेकिन इनमें नेपाल से आने वाला पानी ही बहता है। जो कि लहरपुर, बिसवां व महमूदाबाद तहसील के हिस्से को अपनी चपेट में लेकर बडे पैमाने पर प्रतिवर्ष तबाही मचाता चला आ रहा है। जिससे शारदा व घाघरा नदी ने कटान करके अभी तक तहसील बिसवां के ऐतिहासिक गांव मल्लापुर जिसे राजपूत राजाओं के समय में काफी सम्मानित नजरिये से देखा गया के साथ काशीपुर, गौलोक कोडर जिसकी आबादी सीतापुर में सबसे ज्यादा रही। इस पंचायत में 49 मजरे थे तथा महमूदाबाद की ग्राम पंचायत सोनरख पुरैना जिसकी आबादी लगभग 3 हजार थी उसका निशां बाकी नही रहा। अब एक बार फिर घाघरा नदी अपनी उफान पर है और गांजर के आधा सैकड़ा से अधिक गांवों पर बांढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पिछले दो तीन दिनों में हुई बारिश तथा बैराजों से छोड़े गये लाखों क्यूसेक पानी से घाघरा नदी ने अपना रौद्र रूप धारण करना शुरू कर दिया है। जिसके चलते आधा सैकड़ा से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जैसे जैसे घाघरा का जलस्तर बढ़ता जा रहा है, वैसे वैसे नदी के तलहटी में बसे गांवों के लोगों की नींद उड़ती जा रही है। जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक बाढ़ को रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हो सका है।

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