मुंबई- वालमार्ट फ्लिपकार्ट डील और रिटेल व्यापार में एफडीआई के विरोध में व्यापारियों ने आवाज मुखर की है। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शनिवार को दिल्ली के लाल किला से एक 90 दिवसीय राष्ट्रीय रथ यात्रा निकाली है, जिसे ” सम्पूर्ण क्रांति रथ यात्रा” का नाम दिया गया है । यह रथयात्रा देश के लगभग सभी राज्यों से होते हुए 16 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विराट रैली में परिवर्तित होगी ।
कैट ने 28 सितंबर को वालमार्ट डील एवं रिटेल में एफडीआईके खिलाफ भारत व्यापार बंद का एेलान किया है । देश भर मेंलगभग 7 करोड़ छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान इस बंद में भाग लेंगे। 90 दिवसीय रथयात्रा के दौरान देश भर के राज्यों में ट्रेड एसोसिएशन बड़े पैमाने पर इस डील एवं रिटेल में एफडीआई के खिलाफ कांफ्रेंस, सेमिनार, वर्कशॉप, धरना, प्रदर्शन आदि करेंगे। वालमार्ट डील एवं रिटेल में एफडीआई के अलावा यात्रा व्यापारियों के अन्य महत्वपूर्ण विषयों को उठाएगी, जिनमें विशेष रूप से जीएसटी का सरलीकरण, पारदर्शी ई कॉमर्स पालिसी, डिजिटल भुगतान को अपनाने और उसकी स्वीकार्यता, छोटे व्यापारियों को मुद्रा योजना एवं अन्य रास्तों से आसानी से ऋण मिलना, रिटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय व्यापार नीति, उपभोक्ता संरक्षण कानून को जल्द लागू करना आदि शामिल है। यात्रा में विभिन्न राज्यों के स्थानीय ज्वलंत मुद्दे जैसे दिल्ली मेंसीलिंग और तोड़ फोड़, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों में प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध आदि को भी उठाया जाएगा।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार राष्ट्रीय आंदोलन को तेज़ करते हुए कैट की रथयात्रा यात्रा देशभर में 28 राज्यों में होती हुई लगभग 22 हजार किलोमीटर का रास्ता तय करेगी। यह यात्रा मुख्य रूप से देश के लगभग 120 प्रमुख शहरों से गुजरेगी लेकिन रास्ते में पड़ने वाले लगभग 500 छोटे शहरों एवं कस्बों में भी जाएगी। यात्रा के दौरान लगभग एक करोड़ लोगों से संपर्क किया जाएगा। खंडेलवाल के मुताबिक वालमार्ट फ्लिपकार्ट डील सरकार के वर्ष 2016 के प्रेस नोट 3 का उल्लंघन करती है । वालमार्ट के बाद अब अमेज़न एवं अलीबाबा भी इसी प्रकार की डील के रास्ते तलाश रहे हैं । भारत के रिटेल बाज़ार पर किसी एक कंपनी या कुछ चंद कंपनियों की मनमानी या एकाधिकार किसी भी हालत में चलने नहीं दिया जाएगा। लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, भारी मात्रा में डिस्काउंट देना और कम्पीटिशन समाप्त करने के लिए नुकसान पर माल बेचना जैसी प्रवृतियों ने देश के ई कॉमर्स बाज़ार को विकृत कर दिया है।


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