मुंबई- महाराष्ट्र सरकार ने औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन कानून में बदलाव करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल को इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। निमार्ताओं और विक्रेताओं को दोषी पाए जाने पर पहले लाइसेंस रद्द किए जाते हैं, नए फैसले में अब दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी होगा।
कानून के नियमों में बदलाव करने के लिए विधानमंडल के दोनों सदनों में विधेयक पेश किया जाएगा। औषधि और सौंदर्य प्रसाधनों के उत्पादन और बिक्री के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 1940 में कानून बनाया था। इस कानून के रचना 1945 मे की गई। इस कानून के तहत औषिध एवं सौंदर्य प्रसाधनों का उत्पादन, वितरण, बिक्री के लाइसेंस देने के साथ ही उनकी जांच की जाती है। सुरक्षा के लिहाज से लाइसेंस प्रधिकारी को दोषी पाए जानवालों का लाइसेंस निलंबित या रद्द करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
अब दंडात्मक कार्रवाई के लिए कानून में नई धारा 33-1 बी और धारा 33 एन-2 का समावेश किया जाएगा। इसमें बल्ड बैंक और प्रयोगशालाओं भी कानून के दायरे में होंगी। मौजूदा समय में लगभग 76 हजार 800 औषधि बिक्री के संस्थान और करीब 4400 उत्पादक हैं। इन आंकड़ों में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। औषधि और सौंदर्य प्रसाधन से जुड़े राज्य सरकार के पास छह हजार मामले और विभिन्न कोर्ट में 2200 मामले लंबित हैं।

No comments:
Post a Comment