साल 2016 में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की अगुवाई कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी एस हुड्डा ने कहा कि मोदी सरकार ने सेना को सीमा पार हमले करने की अनुमति देने में बहुत बड़ा संकल्प दिखाया है, लेकिन सेना के हाथ उससे पहले भी बंधे हुए नहीं थे।
हुड्डा विज्ञापन संगठनों द्वारा आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम ‘गोवा फेस्ट’ में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मौजूदा सरकार ने सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में हवाई हमले की अनुमति देने में निश्चित रूप से महान राजनीतिक संकल्प दिखाया है। लेकिन इससे पहले भी आपकी सेना के हाथ नहीं बंधे थे।’ उन्होंने कहा, ‘सेना को खुली छूट देने के बारे में बहुत ज्यादा बातें हुई हैं, लेकिन 1947 से सेना सीमा पर स्वतंत्र है। इसने तीन-चार युद्ध लड़े हैं।’ बता दें कि हुड्डा ने सितंबर 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद सीमा-पार सर्जिकल स्ट्राइक के समय सेना की उत्तरी कमान की अगुवाई की थी।
हुड्डा ने आगे कहा, ‘नियंत्रण रेखा एक खतरनाक जगह है क्योंकि जैसा कि मैंने कहा कि आपके ऊपर गोलीबारी की जा रही है और जमीन पर सैनिक इसका तुरंत जवाब देंगे। वे (सैनिक) मुझसे भी नहीं पूछेंगे। कोई अनुमति लेने का कोई सवाल ही नहीं है। सेना को खुली छूट दी गई है और यह सब साथ में हुआ है, कोई विकल्प नहीं है।’
गौरतलब है इससे पहले सेना के एक पूर्व अधिकारी ने कहा था कि मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले के बाद ही भारतीय सेना पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना बना रही थी लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी गई थी। पूर्व सैन्य अधिकारी के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) कांग्रेस पर हर रैली में हमलावर रही। अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और पीएम मोदी तक ने सैन्य अधिकारी के बायन पर कांग्रेस को घेरा। बीजेपी के नेता इसी बयान को आधार बनाकर कांग्रेस की आलोचना करते रहे हैं।

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