करिश्माई मोदी के समक्ष अहम चुनौतियां | Alienture हिन्दी

Breaking

Post Top Ad

X

Post Top Ad

Recommended Post Slide Out For Blogger

Sunday, 26 May 2019

करिश्माई मोदी के समक्ष अहम चुनौतियां

कमजोर विपक्ष को मौका व स्वस्थ आलोचना सहने के लिए तैयार रहना होगा

अटल जी की कही ध्रुव सत्य बात ‘पड़ोसी नहीं बदले जा सकते’ पर अमल करना होगा

एपी सिंह/ वी. वाल्मिकी

तरुणमित्र। वाह, चमत्कार हो गया ! आम मतदाताओं ने नरेन्द्र भाई मोदी की बातों पर यकीन किया । उन्होंने उनकी बातों को धैर्य से सुना और गंभीरता से चिंतन-मंथन किया। उन्होंने इस कान से सुन कर उस कान से निकाला नहीं ! उन्होंने उनकी ओर भी नजरें दौड़ाईं किंतु सार्थक विकल्प दूर-दूर तक नजर नहीं आया तो एकबार फिर मोदी को ही मौका देने का मन बनाया। मोदी की मन की बातों को दिल से समर्थन दिया। लोकसभा निर्वाचन का यह चौंकाने वाला और अप्रत्याशित परिणाम इसका सबूत है। संभवत: मोदी को भी ऐसी उम्मीद नहीं होगी। वैसे आजाद भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में जहां सिद्धांत तथा मूल्यों में अनवरत क्षरण और झूठ के बाहुल्य ने अविश्वसनीयता की ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि विश्वासनीयता का आकाल पड़ गया है। ऐसी विकट परिस्थिति में आमजनता या मतदाता किसी राजनीतिक दल नहीं, व्यक्ति को दोबारा शासन की बागडोर संभालने का मौका दे , यह बड़ी बात कही जायेगी। ऐसा नहीं कि पांच साल पहले मोदी ने जनता से जो-जो वायदे किए थे सो सब पूरे कर दिए। उन्होंने कुछ को पूरा करने के प्रयास जरूर प्रारंभ किये। कुछ पूर्णता की ओर हैं तो कुछ अधूरे, जिन्हें पूरा करने के लिए समय ,माहौल और संसद में पूर्ण बहुमत की जरूरत रही। मोदी के कई कदमों के नतीजे आशा के अनुरूप नहीं आये, किंतु ऐसा नहीं कि उनकी नीयत में खोट थी ! इस निर्वाचन में उनकी देश भक्ति, भ्रष्टाचारमुक्त शासन और विदेशों में देश का मान बढ़ाने के प्रयास अधिक प्रभावी रहे। मोदी को उम्मीद से अधिक मतदाताओं का प्यार, विश्वास और समर्थन उनकी जिम्मेदारी और चुनौतियों को और बढ़ा देते हैं। उन्हें हर कदम फूंक-फूंक कर उठाना पड़ेगा , जो जनहित और राष्ट्रहित में तो हो ही पारदर्शी भी हो। उन्हें अपने कदमों की स्वस्थ आलोचना सहने के लिए मन से तैयार रहना होगा। कमजोर प्रतिपक्ष की जायज बातों पर गौर फरमाने के लिए तैयार रहना होगा। ऐसा न कि उन्हें कमजोर जान कर नकार दिया जाय। ऐसा करना लोकतांत्रिक मयार्दाओं के विपरीत होगा। विपक्ष को भी सदन और बाहर भी अपनी सार्थक भूमिका अदा करनी होगी। संसद में सार्थक बहस हो और संसद की कार्यवाही अनावश्यक बाधित न हो इस पर ध्यान देना होगा। मोदी को संवैधानिक संस्थाओं की अस्मिता पर खरोंच नहीं लगे इस पर चौतरफा नजर रखनी होगी।
हां, जिन 65% युवा आबादी की दुहाई ने इक्कीसवीं सदी की अभूतपूर्व विजयश्री दिलाई है उनका भविष्य अंधकारमय न हो इसको तवज्जो देना होगा। उनकी शिक्षा की समुचित व्यवस्था, ब्रेन ड्रेन रोकने के लिए शोधकतार्ओं को संसाधन की व्यवस्था करने तथा प्रोत्साहन देने एवं बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने होंगे। इनके लिए बयान देने की नहीं, जमीनी कदम उठाने की जरूरत होगी। कुटीर,लघु,मध्यम एवं कुछ बड़े उद्योगों का जाल बिछाना होगा। इसके साथ ही कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में कदम उठाने होंगे। किसानों को कर्ज़माफी की रेवड़ियां नहीं , खेती के लिए समय पर पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने होंगे। कृषि उत्पादन के लिए बाजार सुलभ कराने होंगे। इन सबों के लिए धन की कमी नहीं हो इसलिए सस्ती ख्याति बटोरने के लिए सदाबरत बांटने या अनुत्पादक मदों में व्यय पर रोक लगाने होंगे। यथा हाथी-घोड़े की प्रतिमाओं और आदरणीय महापुरुषों की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने की होड़ से निकल कर उनके प्रति अन्तर्मन से श्रद्धा निवेदित करने पर बल देना होगा। हां,जिनकी प्रतिमाएं नहीं लगी हैं उनकी जरूर लगायी जायं पर क्यों नहीं उस पर खर्च होने वाली अधिक राशि से उनके नाम पर उद्योग लगाए जायं या शिक्षण और शोध संस्थान खोले जायं । उसी में उनकी आदमकद प्रतिमा भी लगायी जायं ताकि लोग उनके प्रति श्रद्धा निवेदित कर प्रेरणा ले सकें।
आंतरिक सुरक्षा , शांति ,सदभाव बना रहें इस पर भी गहन चिंतन-मनन करने होंगे । उग्रवाद की जड़ों की खोज कर उन्हें निष्प्रभावी करना होगा। केवल बल प्रयोग से समस्या का समाधान संभव नहीं, रचनात्मकता भी जरूरी है। प्रेम और संवाद ऐसी चाबी हैं जो वर्षों से बंद मानसिक ताले को खोलने में समर्थ हो जाती हैं। संत विनोबा भावे और लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने चम्बल के बीहड़ों के दुर्नाम और खूंखार डाकुओं का आत्मसमर्पण कराकर सामान्य जीवन जीने के लिए राजी करा लिया। भारतीय इतिहास में इस तरह के कई उदाहरण हैं हृदय परिवर्तन के। डाकू अंगुलिमाल को महात्मा बुद्ध के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा।
मोदी ने विदेशों में देश का मान बढ़ाया है इसमें कोई शक नहीं और आगे भी बढ़ायेंगे। पर, उन्हें स्वर्गवासी अटल बिहारी वाजपेयी जी की कही ध्रुव सत्य बात को स्वीकारते हुए कि …पड़ोसी नहीं बदले जा सकते… पर गौर फरमाना होगा। पड़ोसियों से अच्छे संबंध बनाने के लिए बड़े भाई के रूप में हाथ बढ़ा कर उन्हें स्नेह, सौहार्द और सौगात से सहज बनाते हुए सही रास्ता दिखाना होगा ताकि वे भी विकास के सोपान चढ़ सकें। हां, याद रहे भारत की अखण्डता पर कोई आंच न आए। लोकतंत्र के चुनावी समर में अकेले विजयश्री का कीर्तिमान स्थापित करने के लिए करिश्माई व्यक्तित्व के धनी नरेन्द्र भाई मोदी को तहेदिल से बधाई और आम मतदाताओं को साधुवाद!

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad