कहीं हैं ऐसे अध्यापक जरुरत है/अनुभवी योग्य अध्यापकों की वेतन 4 हजार प्रतिमाह
इंग्लिश मीडियम कान्वेंट और पब्लिक शिक्षा
पिहानी,हरदोई।नगर में संचालित हैं ऐसे स्कूल जो बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था पर लोकप्रिय होकर सुर्खियां बटोरकर आज सिर्फ रुपए बटोर रहे हैं।जब बात आती है बच्चों के दाखिले की।तो नजर जाती है कस्बे में संचालित अच्छे स्कूलों की।ऐसे में जब कोई व्यक्ति किसी से करता है अच्छे स्कूलों की जानकारी।तो हर व्यक्ति की जुबान पर सस्ते दामों में बढ़िया स्कूल का नाम आता है ताहिर पब्लिक स्कूल और फिर महँगे स्कूलों में बढ़िया स्कूल का नाम लिया जाता है सेंट जेवियर्स पब्लिक।मगर कभी ताहिर पब्लिक स्कूल की शिक्षा के मुकाबले सेंट जेवियर्स पब्लिक स्कूल की भी शिक्षा फेल रही है। सेंट जेवियर्स का तीसरी क्लास का बच्चा ताहिर पब्लिक स्कूल के प्रथम कक्षा के मुकाबले पर भी खरा नहीं होता था।आज की हकीकत ये है कि ये स्कूल अब अपनी लोकप्रियता का नाजायज फायदा उठाने लगे हैं।इसलिए पब्लिक को गुमराह करके जमकर धोखाधड़ी व लूट मचाए हैं।यूँ तो शिक्षा के स्तर से नगर में दर्जन भर से भी अधिक कान्वेंट व पब्लिक स्कूल संचालित हैं।मगर दर्जनों स्कूल शिक्षा क्षेत्र के धँधे और बिजनेस से जोड़कर चलाए जा रहे हैं।इन स्कूलों की सभी कक्षाओं में पढ़ाई जाने वाली सभी किताबों के कोर्स एकत्रित कापी कलम सहित पैकिंग करवाकर एक ही बुक स्टाॅल पर सट्टे की भाँति मनमानी ऊँचे मूल्यांकन मुद्रा पर विक्रय की जा रही हैं।लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी का विषय है जो अभिभावकों और बच्चों को गुमराह करके ठगाई करने पर तुला है।इन दर्जन भर स्कूलों में आज भी ताहिर पब्लिक स्कूल की जो लोकप्रियता व गुणवत्ता है वो सबसे उच्च स्तर की जानी-समझी जाती है।जाने-माने इन स्कूलों में आज ताहिर पब्लिक या सेंट जेवियर्स पब्लिक जैसे स्कूलों का नाम सबसे ऊपर क्यूँ लिया जाता है?क्योंकि इन स्कूलों की शुरुआत जबरदस्त रही है अर्थात् बेरोजगारी के दौर से गुजर रहे योग्य अध्यापकों ने सस्ते वेतनमान पर कड़ी मेहनत के योगदान देकर इन स्कूलों में व्याप्त शिक्षा गुणवत्ता की नींव को इतना मजबूत बना दिया है कि इन स्कूलों की शिक्षा प्रणाली प्रभावित होने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ सकता।इन स्कूलों में देखा जाए तो आज जिन अध्यापकों के माध्यम से बच्चों को शिक्षित कराया जा रहा है उन अध्यापकों का कमजोर शिक्षण-प्रशिक्षण उनकी कम उम्री व अनुभवी योग्य अध्यापकों की श्रेणी से काफी दूरी का सीधा परिचय देती हैं।दरअसल संज्ञान में आया है कि इंटर बीए करके बैठी युवा पीढ़ी अपने खर्च के लिए कम मेहनत का कोई काम करना पसंद करती हैं और कान्वेंट स्कूल इंटर बीए वालों को टीचर बनाकर 2 से 4 हजार रुपये प्रतिमाह तक मानदेय देकर अपना काम चलाना चाहते हैं।कम उम्र की बालिकाओं के लिए 2-3 हजार प्रतिमाह का वेतन उनकी उम्र और योग्यता के हिसाब से पर्याप्त हो जाता है।विचार करने योग्य तथ्य है कि जो टीचर खुद ही योग्य और अनुभवी नहीं हैं तो वे हमारे बच्चों को योग्य कैसें कर सकते हैं।क्या अनुभवी और योग्य अध्यापक 2-4 हजार रुपये में नौकरी करते हैं?नवयुवक नवयुवतियाँ 2-4 हजार वेतन लेकर टाइम पास कर सकते हैं, मेहनत करके शिक्षा की गुणवत्ता नहीं बढ़ा सकते हैं।नीम मुल्ला खतरै ईमान।नीम हकीम खतरै जान।इसी प्रकार नीम मास्टर खतरै जान और ईमान दोनों है।

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