(अशोक मिश्र)
जयपुर। भारत में बलात्कार राष्ट्रीय त्रासदी के रूप में हैं, इस समस्या से तब तक कोई परेसान नहीं होता जब तक मामला अपने कुनबे का न हो या फिर कोई राजनीतिक लाभ न मिल रहा हो।अलवर में बलात्कार की घटना भारत में हुए अब तक के यौन अपराधों में शीर्ष घटनाओं में हैं।कांग्रेस शासित प्रदेश राजस्थान हमेशा दलितों के उत्पीड़न के लिए सुर्ख़ियों में रहा हैं।
इस घटना में एक चीज नहीं देखने को मिल रही हैं वो हैं दलित चिंतकों की खामोसी आम तौर पर जब ऐसे मामले होते हैं जिग्नेश,दिलीप मंडल,बामन मेश्राम,रावण ऐसे बहुत सारे नाम जो दलितों की चिंता करते करते खुद नेता बन गए लेकिन दलित समाज वही खड़ा हैं।दलित चिंतकों का दुराग्रह ये हैं कि वो अपने फायदे के लिए ही कैंडल मार्च निकालते हैं।अगर यहीं सरकार गलती से भाजपा की होती तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक ईंट से ईंट बजा दी गईं हो।
आखिर ये सुविधानुसार चिंतन कब तक।जबसे हमारे देश में चिंतन की परंपरा ने जातिगत रूप ले लिया हैं तबसे समस्या और जटिल हुई हैं।बलात्कार किसी बेटी के लिए चिंता का विषय हैं चाहे वो दलित यादव, ब्राह्मण, बैस्य, कोई हो। लेकिन तुस्टीकरण की राजनीति ने अपराधों को भी श्रेणी में बाँट रखा हैं।अपराधियों को पकड़ने में हुई हीला हवाली से ये बात जाहिर होती हैं कि सरकारी अमला अपराधियों के कितने दबाव में रहा होगा।अंततोगत्वा राहुल गांधी ने राजस्थान सरकार से रिपोर्ट मांगी हैं। मरहम के तौर पर कुछ लाख रूपये मिल जाएंगे और सभ कुछ फिर अपने पुराने ढर्रे पर आजयेगा।

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