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Thursday, 9 May 2019

आईएनएस विराट’प्राइवेट टैक्सी’ विवाद : नौसेना के पूर्व अधिकारी का दावा-हमें चुप रहने के लिए कहा गया

नई दिल्ली : भारतीय युद्धपोत आईएनएस विराट को ‘प्राइवेट टैक्सी’ की तरह इस्तेमाल करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोपों पर सियासत गरमा गई है। पीएम ने कहा है कि राजीव गांधी ने अपनी छुट्टियां बिताने के लिए आईएनएस विराट का ‘प्राइवेट टैक्सी’ की तरह इस्तेमाल किया। वहीं, कांग्रेस ने कहा है कि पूर्व पीएम राजीव गांधी ने आईएनएस विराट का इस्तेमाल छुट्टियों के लिए नहीं बल्कि आधिकारिक उद्देश्य के लिए किया था। इस बीच, आईएनएस विराट पर नौसेना अधिकारी रहे कोमोडोर हरिंदर सिक्का ने टाइम्स नाउ से बातचीत में कहा कि इस बारे में उन्होंने निजी तौर पर शिकायत की थी लेकिन उन्हें चुप करा दिया गया।

नौसेना के पूर्व अधिकारी ने कहा, ‘आईएनएस विराट को निजी तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर नौसेना के अधिकारियों में नाराजगी थी लेकिन हम लाचार थे क्योंकि न तो हम अपनी आवाज उठा सकते थे और न ही शिकायत कर सकते थे। ऐसा करने पर हम पर केस दर्ज हो जाता। आप नौसेना के एक पिन का भी यदि इस्तेमाल करते हैं तो इसकी लिखित में अनुमति लेनी होती है।’

उन्होंने कहा, ‘आईएनएस विराट उस समय हमारा प्रमुख युद्धपोत हुआ करता था। यहां तक कि उस समय कई ऐसे मौके भी होते थे जब नौसेना के अफसरों को सुरक्षा कारणों के चलते डेक पर आने की मनाही होती थी। प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी के इस युद्धपोत पर होने पर आपत्ति नहीं थी लेकिन उनकी पत्नी उस समय विदेशी नागरिक थीं। युद्धपोत पर विदेशी नागरिक के होने पर हमें आपत्ति थी।’

अधिकारी ने आगे कहा, ‘युद्धपोत का निजी इस्तेमाल किया गया। उस समय आप प्रधानमंत्री थे, आप को कौन रोक सकता था। तत्कालीन प्रधानमंत्री की पत्नी उस समय न केवल आईएनएस विराट पर गईं बल्कि उन्होंने संवेदनशील एवं सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कई डिपो एवं रक्षा प्रतिष्ठानों का दौरा किया।’

पूर्व अधिकारी ने कहा, ‘युद्धपोत पर रणनीतिक एवं सामरिक उपकरण लगे होते हैं। उस पर सोनार रडार की तैनाती एवं सैन्य ऑपरेशन से जुड़ी संवेदनशील तकनीक होती है। ऐसे में युद्धपोत के डेक पर विदेशी मेहमानों की उपस्थिति नहीं होनी चाहिए। उस समय नेवी के अधिकारियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहते थे।’

इस बार में उस समय किसी ने इस बारे में शिकायत क्यों नहीं की। इस सवाल पर पूर्व अधिकारी सिक्का ने कहा, ‘हम खुले तौर पर इस पर जांच नहीं बिठा सकते थे। अगर आप ऐसा करते तो इसे विद्रोह कहा जाता। मैंने उस समय के अपने कमाडिंग अफसर के सामने इस मुद्दे को उठाया था लेकिन मुझसे कहा गया कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री हैं। हमें इस बारे में मुंह बंद रखने के लिए कहा गया। यह काफी आपत्तिजनक था। इस तरह की चीजें तब नहीं होनी थीं और आज भी नहीं हो सकतीं।’

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री युद्धपोत पर आ सकते हैं लेकिन उनकी पत्नी यदि विदेशी नागरिक हैं तो उन्हें इस शिप पर आने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि यह युद्धपोत किसी परिवार का नहीं था।’

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