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Friday, 10 May 2019

सिंगापुर में फेक न्यूज पर अंकुश के लिए कानून, भारत में भी उठ चुकी है मांग

फर्जी खबरें दुनियाभर में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अमेरिका से लेकर यूरोप और एशिया के कई देशों में फर्जी खबर एक बड़ी परेशानी बनी हुई है, जिसमें सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही है। फेसबुक, व्‍हाट्स एप सहित सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्‍स पर ऐसी खबरों के प्रसार के लिए उंगली उठती रही है। कई देशों में इसके नियमन के लिए कानून बनाए गए हैं तो कहीं इसकी मांग उठ रही है।

भारत में भी फेक न्‍यूज पर अंकुश की मांग उठती रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्‍मेदारी संभालते हुए केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी ने फेक न्‍यूज पर लगाम लगाने के लिए नया कानून लाने की बात कही थी, जिसपर बड़ा विरोध हुआ था। एडिटर्स गिल्‍ड के साथ-साथ कई लोगों ने इसका विरोध किया था। यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में भी छाया रहा और सरकार पर प्रेस व अभिव्‍यक्ति की आजादी को खत्‍म करने के आरोप लगे।

भारी दबाव के बीच सरकार ने इसे वापस ले लिया। लेकिन सिंगापुर में सरकार ने फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कानून पारित कर दिया है, जो अगले कुछ सप्‍ताह में लागू हो जाएगा। इसके लागू हो जाने के बाद सरकार को यह अधिकार होगा कि वह फर्जी सामग्रियों को ब्लॉक कर सके या उसे हटा दे। इसे ऑनलाइन झूठ और हेरफेर से संरक्षण विधेयक नाम दिया है, जो बुधवार को 9 के मुकाबले 72 मतों से पारित हो गया।

इसके दायरे में चैट ग्रुप्स और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्‍शन वाले ऐप सहित सोशल मीडिया ग्रुप्‍स भी आएंगे, जिसका अर्थ यह है कि व्‍हाट्स एप और टेलिग्राम भी इससे प्रभावित होंगे, जो सिंगापुर में बेहद लोकप्रिय हैं। सरकार का हालांकि कहना है कि यह कानून लोगों को फेक न्‍यूज से बचाएगा, क्‍योंकि इसके जरिये उन खबरों पर लगाम लगाई जाएगी, जो जनहित में नहीं होंगी। लेकिन आलोचक इसे लोगों के निजता के अधिकार का उल्‍लंघन और उनकी स्‍वतंत्रता के लिए बड़े खतरे के तौर पर देखते हैं।

इस कानून के तहत दोषियों के लिए 10 साल तक कैद और उन पर भारी-भरकम जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है। जनअधिकार से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि ऐसे में न्यूज वेबसाइट्स पर सरकारी प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने का दबाव बढ़ सकता है और सरकारी नीतियों का विरोध करने पर उन्‍हें नोटिस मिल सकता है। एमनेस्‍टी इंटरनेशनल का भी कहना है कि यह कानून सिंगापुर की सरकार को अपनी नापसंद की ऑनलाइन चीजों पर अंकुश के लिए बेलगाम शक्तियां देता है।

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