चित्रकूट। मासूम भाइयों का अपहरण कर हत्या करने वाले एक आरोपी रामकेश यादव ने सतना सेंट्रल जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रामकेश यादव चित्रकूट के आयुर्वेदिक तेल कारोबारी ब्रजेश रावत के जुड़वा बेटो प्रियांश और श्रेयांश को अगवा कर हत्या के बाद लाशों को नदी में फेंकने का आरोपी था। 12 फरवरी को जुड़वां भाइयों का हुआ था अपहरण। पांच आरोपी अभी भी जेल के अंदर हैं। आपको बता दें कि चित्रकूट के जानकीकुंड परिसर से दिनदहाड़े जुड़वा मासूम भाइयों को अगवा करने की साजिश इंजीनियरिंग के छात्रों ने पैसों के लिए रची थी। पुलिस की पूछताछ के दौरान शातिरों ने पूरे घटनाक्रम को कुबूल किया था। पहचान के भय से उन लोगों ने मासूमों को मौत के घाट उतार दिया। यह छात्र इतने शातिर निकले कि परिजनों से फिरौती की रकम मांगने के लिए खुद के बजाए राह चलते लोगों के फोन का इस्तेमाल किया।
चित्रकूट में आईजी रींवा चंचल शेखर ने मीडिया के सामने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया था। कहा कि जुड़वा भाइयों को अगवा करने के बाद से डीआईजी रींवा की अगुवाई में एक एसआईटी गठित की गई थी। जिसमें सतना एसपी संतोष सिंह गौर समेत कई टीमें शामिल रहीं। प्रत्येक पहलू पर टीमों ने जांच की। आईजी ने शातिरों से की गई पूछताछ के बाद घटनाक्रम का सिलसिलेवार खुलासा किया। इस वारदात का मास्टर माइंड विश्वविद्यालय में बीआईटी का छात्र पद्म शुक्ला जानकीकुंड रघुवीर मंदिर के सामने का रहने वाला निकला।
पद्म ने भभुवा थाना मर्का जनपद बांदा के राजू द्विवेदी के साथ बाइक से जुड़वा भाइयों को अगवा किया था। इसके बाद तेंदुरा थाना बिसंडा, बांदा निवासी लकी उर्फ आलोक सिंह तोमर ने इन बच्चों को चार पहिया वाहन से दूसरी जगह शिफ्ट करने में भूमिका निभाई। इनके अलावा छेरा, बांदा के ट्यूशन शिक्षक रामकेश यादव व उसके मामा हमीरपुर के पिंटू उर्फ पिंटा और बिहार के विक्रमजीत सिंह भी वारदात में शामिल रहे। रामकेश व पिंटू को छोडकर अन्य सभी चार लोग विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे।

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