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Thursday, 9 May 2019

हरदोई- जीभा पर जितनी ममता रखी जाए उतनी ही अधिक सतयोगी- आचार्य सत्येंद्र

हरपालपुर
कटियारी क्षेत्र के इकनौरा में चली रही श्री देवी भागवत एवं शतचंडी यज्ञ में गुरुवार को जबलपुर मध्यप्रदेश से आये डॉ०सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री जी ने आज इंद्रिय के बारे में कहा इंद्रियों को चाहे जितना तृप्त किया जाए आज तक न तृप्त हुई है ना होने वाली है ना होगी।जिहवा पर जितनी ममता रखी जाए उतनी ही अधिक सतायेगी जीभ को प्रसन्न रखने की कोशिश में आंख बिगड़ेगी मन बिगड़ेगा और चेतना भी बिगड़ेगी।सभ्य व्यक्ति होटल या सिनेमा में सुख आनंन्द ढूढते हैंकिन्तु वहां जीभ और आंखों के बिगड़ने आलावा कोई लाभ नही मिलता है।पैसे खर्च करके तीन घंटे तक अंधेरे में बैठे रहने से कोई लाभ नही मिलता इसको देखने से मन को विश्राम नही मिलता उल्टे दुःख का अनुभव होता है।
इसका अर्थ यह है। श्रंगारिक दृश्यो को देखकर बिगड़ा हुआ मन स्पर्श सुख के लिए पागल बन जाता है और जीवन का सम्पूर्ण विवेक खो बैठता है।और उन्होंने कहा देवी भागवत अन्य किसी भी कथा को सुने हुए को यदि हम कार्य रूप में परिणित करे तभी उसकी सार्थकता है। इस मौके पर कृष्ण कुमार मिश्र, संकर्षण मिश्रा, बी जी मिश्रा, रंजना मिश्रा ,पूनम त्रिपाठी बद्री नारायण सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।

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