नई दिल्ली। भाजपा सांसद और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने अपने एक निजी विधेयक में मैच फिक्सिंग के लिए कम से कम 10 साल की सजा और मामले में शामिल राशि का पांच गुना जुर्माना लगाने के प्रावधानों का प्रस्ताव रखा है।
यह गैर सरकारी विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है।
नियामक संस्था का गठन किया जाए
इसमें प्रस्ताव है कि इस तरह के अनियमितताओं के मामलों को रोकने के लिए खेल संघों के लिए एक नियामक संस्था का गठन किया जाए जिसके पास एक दीवानी अदालत की तरह अधिकार हों। ठाकुर ने इस विधेयक में प्रस्ताव रखा है कि सभी खेल संघ डोपिंग, मैच फिक्सिंग, आयु संबंधी धोखाधड़ी, महिलाओं के यौन उत्पीड़न और खेलों में अन्य अनैतिक आचरण के मामलों में प्रस्तावित राष्ट्रीय खेल आचरण आयोग को रिपोर्ट करेंगे।
कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान
विधेयक के अनुसार आयोग में उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के चार सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ छह सदस्य होंगे और भारत के प्रधान न्यायाधीश से परामर्श करके सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। विधेयक में खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों दोनों ही की तमाम तरह की अनियमितताओं के लिए कड़ी सजा और जुर्माने के प्रावधानों का प्रस्ताव है। इसमें कहा गया है कि मैच फिक्सिंग के लिए दोषी पाए गए किसी भी व्यक्ति को उस अवधि के लिए सश्रम कारावास की सजा दी जाएगी जो 10 साल से कम नहीं होगी और या जुर्माना लगाया जाएगा जो मैच फिक्सिंग में शामिल राशि का पांच गुना होगा।
स्वत: संज्ञान ले सकता है आयोग
विधेयक के मसौदे के अनुसार आयोग किसी भी खेल में किसी तरह की धोखाधड़ी या अनियमितता पर स्वत: संज्ञान ले सकता है और कोच, संबंधित खिलाड़ी या संघ के सदस्यों को भी तलब कर सकता है। अपने निजी विधेयक का उद्देश्य बताते हुए ठाकुर ने कहा कि किसी भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मैच-फिक्सिंग और ऐसे अन्य अपराधों को विशेष आपराधिक कानून के तहत लाता हो।
-एजेंसी
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