इंदौर। IVF तकनीक से तीन साल में 124 पारसी बच्चे जन्मे , तीन साल में 124 बच्चे किसी और समुदाय के लिए यह संख्या मामूली हो सकता है, लेकिन पारसी समाज के लिए यह जादुई आंकडे से कम नहीं है। जिस समाज में 900 मौतों की तुलना में हर साल केवल 200 बच्चे जन्म ले रहे हों, कृत्रिम गर्भाधान से जन्मे ये बच्चे समाज के लिए उम्मीद की किरण हैं। इन बच्चों में एक इंदौर का भी है।
अल्पसंख्यक मंत्रालय ने 2013 में ‘जीयो पारसी’ योजना शुरू की थी
देश में पारसियों की आबादी बढाने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने 2013 में ‘जीयो पारसी’ योजना शुरू की थी। जिसके तहत केंद्र सरकार कृत्रिम गर्भाधान यानी IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) या इन्ट्रा सेप्टोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन के लिए पारसी जोड़ों को अनुदान देती है। 12 दिन पहले मुंबई में जब एक बच्चे ने जन्म लिया तो योजना के तहत पैदा होने वाले बच्चों की संख्या 124 हो गई।
‘जीयो पारसी’ की नेशनल टीम लीडर डॉ. शेरनाज कामा कहती हैं-‘तीन साल में 124 की संख्या कम लग सकती है, लेकिन हमारे लिए यह नई उम्मीद है। मुंबई, पुणे, कोलकाता, सूरत, नौसारी, सिकंदराबाद, बैंगलु जैसे बडे शहरों में अच्छे परिणाम आ रहे हैं।
दूसरे चरण में इंदौर, महू, चेन्नई जैसे शहरों में रहने वाले पारसी समुदाय के बीच अभियान चलाया जाएगा।’
अधिक उम्र में शादी से उपजने वाली बडी परेशानी का हल
कृत्रिम गर्भाधान IVF पर प्रोग्राम को-आर्डिनेटर (मुंबई) डॉ. कैटी गनवेदिया कहती हैं कि यह अधिक उम्र में शादी से उपजने वाली परेशानी का हल है, लेकिन मुंबई जैसे शहरों में मकान, खर्चीली शिक्षा, जीवन शैली और युवा जोड़ो पर बुजुर्ग सदस्यों की जवाबदारी भी परिवार नहीं बढाने का ब़़डा कारण है। इंदौर में एक पारसी महिला ने IVF करवाया था। अब वे मुंबई में हैं। उन्हें बेटा हुआ है। -Agency
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