
कमरुल खान-
बिलग्राम हथौड़ा गांव के एकमात्र होम्योपैथिक अस्पताल में डाक्टर नहीं
कंपाउंडर के सहारे चलता है अस्पताल
बिलग्राम हरदोई – विश्व होम्योपैथिक दिवस पर बिलग्राम के हथोड़ा गांव में स्थित एकमात्र होम्योपैथिक चिकित्सालय की दुर्दशा को देखा जाए तो आज के दिन भी किसी होम्योपैथिक डॉक्टर की उपलब्धता नहीं रही, जबकि सामान्य जन इस होम्योपैथिक चिकित्सा का काफी संख्या में प्रयोग भी करने लगे हैं। यह देखने में आया है कि इस भागदौड़ की जिंदगी में इंसान हर काम बहुत जल्दबाजी में करना चाहता है। चाहे उसे इसकी कीमत जो कुछ भी चुकानी पडे, वो चुकाने को तैयार रहता है और जब वो बीमार होता है तो उस समय भी उसे जल्दी ठीक होने के लिए जल्दबाजी रहती है और ऐसे में उसे तुरंत ठीक करने के लिए डाक्टरों को एलोपैथी का सहारा लेना पड़ता है लेकिन ये अंग्रेजी दवाएं एक बीमारी को तो ठीक करतीं हैं और दूसरी समस्या उत्पन्न कर देती हैं परंतु जिस आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और युनानी औषधि बीमारी को देर से ठीक करने वाली बता कर नजरअंदाज कर देते थे ,अब वही लोग जब एलोपैथी खा खाकर नहीं ठीक हुये तो फिर ऐसे लोग होम्योपैथिक चिकित्सा अपनाने लगे हैं लेकिन हमारे यहां अच्छे और क्वालीफाई डाक्टर की कमी के चलते ये होम्योपैथी चिकित्सा दम तोड़ रही है।
ब्लाक बिलग्राम के नूरपुर हथौड़ा ग्राम में एकमात्र ही होम्योपैथी अस्पताल है जहाँ पर कोई भी डाक्टर की तैनाती न होने के कारण इस चिकित्सा से महरुम हो रहे हैं ।आये दिन वहाँ मरीज बढते जा रहे हैं लेकिन वहाँ डाक्टर न होने की वजह से कम्पाउंडर ही दवा देते हैं जिसकी वजह से पूर्ण रूप से बीमारी के लक्षणों को न समझ पाने से कम्पाउंडर के द्वारा दी गई दवाई जब असर नहीं करती है तो कहीं न कहीं लोगों का विश्वास होम्योपैथी पर कम हो जाता है। ऐसे में अगर किसी प्रशिक्षित डाक्टरों द्वारा दवाई दी जाये तो लोगों को फायदा भी हो और इस पैथी पर ज्यादा विश्वास भी बढ़े और लोग कम खर्च कर बेहतर इलाज पा सकें, क्यों कि होम्योपैथी इलाज लक्षणों पर आधारित होता है इसमे रोग के लक्षणों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। जिस प्रकार आयुर्वेद में कफ-पित्त और वायु है, उसी प्रकार होमियोपैथी में सोरा, सिफलिश और सायकोसिस है।90 प्रतिशत रोगों का मूल कारण सोरा दोष का बढ़ना है।इसी दोष की सक्रियता के कारण शरीर में खाज, खुजली, सोरायसिस, कुष्ठरोग तथा पेट के अन्य रोग होते हैं। सायकोसिस विष के कारण शरीर में अतिरिक्त वृद्धि जैसे- रसौली, गांठ, मस्से, कैंसर आदि हो जाता है और सिफलिश के कारण यौन-रोग आदि होते हैं।होम्योपैथिक दवा की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती,यदि इन दवाइयों को धूप, धूल, धुंआ, तेज गंध व केमिकल्स से बचाकर रखा जाये तो यह दवा वर्षों तक चलती रहेंगी।इन दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।इन दवाओं से कोई विशेष परहेज नहीं होता।दवा को लेने के आधा घंटा पहले और आधा घंटा बाद तक कुछ खाना-पीना नहीं चाहिए।

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