लखनऊ। अपनी 12 सूत्रीय मांगों कही अनदेखी से नाराज उत्तर प्रदेश राजकीय वाहन चालक महासंघ ने तय किया है कि अगर अपै्रल तक उनकी समस्याओं को निस्तारण नहीं हुआ तो वह मई माह से सड़कों पर उतरेंगे। रविवार को दारूलशफा में महासंघ के अध्यक्ष रामफेर पाण्डेय की अध्यक्षता हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।महासंघ के महामंत्री मिठाई लाल ने बताया कि संगठन अपनी 12 सूत्रीय मांगों के निस्तारण के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर तक ज्ञापन पदे चुका है। बीती 18 जनवरी को राजधानी में शान्ति मार्च भी निकाला है, लेकिन अभी तक शासन स्तर पर न तो मांगों निस्तारण किया गया न ही कोई द्विपक्षीय वार्ता की गई। संगठन ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए तय किया कि अप्रैल माह में अगर समस्या का निस्तारण नही होता तो मई माह में किसी भी समय राजकीय वाहन चालक महासंघ के बैनर तले राजकीय वाहन चालक सड़क पर उतर जाएगें।
महासंघ के अध्यक्ष रामफेर पाण्डेय ने जनपद अध्यक्षों एवं मंत्रियों को जनपद स्तर पर कार्यरत राजकीय वाहन चालकों से आन्दोलन के लिए तैयार रहने का आहवान किया।
महासंघ की 12 मांगों में प्रमुख मांग है कि उ.प्र. राजकीय वाहन चालकों को मौलिक नियुक्ति का ग्रेड वेतन 1900 के स्थान पर 2000 रूपये की जाए, स्टॉफ कार चालक पदोन्नति स्कीम से अनुपात हटाया जाय। चालकों के रिक्त पदों पर भर्ती की जाए और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए।

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