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Thursday, 28 June 2018

सरकार के बनाये कानून से लाखों महिलाओं की नौकरियां खतरे में

महिलाओं की सहूलियत के लिए केंद्र सरकार ने जो कानून बनाया था, अब वहीं उनके खिलाफ जाता दिख रहा है। केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए महिलाओं की पेड मैटरनिटी लीव तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दी थी।

महिलाओं को वर्कफोर्स में बनाए रखने के लिए कानून में हुए इस बदलाव ने भारत को कनाडा और नॉर्वे जैसे प्रगतिशील देशों की कतार में खड़ा कर दिया था। हालांकि एक नए सर्वे के मुताबिक, महिलाओं को इस नियम से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है।

टीमलीज़ सर्विसेज़ के मुताबिक, भारत में इस कानून की वजह से स्टार्टअप्स और छोटे बिजनेस में महिलाओं की जगह नहीं मिल पा रही है। सर्वे के मुताबिक, इस कानून की वजह से फाइनेंशियल ईयर अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक 10 सेक्टर्स में 11 लाख से 18 लाख महिलाओं की नौकरी जा सकती है।

आपको बता दें कि मातृत्व प्रसूति लाभ अधिनियम (संशोधित) के तहत कामकाजी महिलाओं को 12 हफ्तों के बजाय 26 हफ्तों की पेड लीव दिया गया है। हालांकि, कई कंपनियां पहले से ही महिला कर्मचारियों को यह सुविधा दे रही थीं। आपको बता दें कि भारत में महिला कर्मचारियों की संख्या 2005 में 37 फीसदी से फिसल कर 2013 में 27 फीसदी पर आ गई।

टीमलीज़ सर्विसेज की सह-संस्थापक और कार्यकारी उपाध्यक्ष ऋतुपर्णा चक्रवर्ती कहती हैं, ‘पुराने आंकड़ों के अनुसार, 2004-05 से 2011-12 में महिलाओं की निकासी की दर सात साल में 28 लाख रही। संशोधित मातृत्व लाभ अधिनियम के बाद एक साल में 11 से 18 लाख महिलाओं की नौकरी जाना हैरान करता है।

चक्रवर्ती ने कहा कि अगर हम इसे हर सेक्टर्स के साथ जोड़कर देखें, तो मातृत्व लाभ अधिनियम के चलते एक साल के भीतर करीब 1 से 1.20 करोड़ महिलाओं की नौकरी जा सकती है।

वित्त वर्ष 2017 में महिलाओं के लिए 60 लाख नौकिरियों के मौके बने थे. हालांकि, वित्त वर्ष 2018 में कुल 50 लाख महिलाओं की नौकरियां चली गईं। रिपोर्ट में इसके लिए नोटबंदी को बड़ा कारण करार दिया गया। इस वजह से वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2018 के साथ नौकरियों की तुलना करना कठिन है। साथ ही मध्यम अवधि में मातृत्व के बाद नौकरियों पर लौटने वाली महिलाओं की दर भी 56 फीसदी से घटकर महज 33 फीसदी तक रह जाएगी।

जानकारों के अनुसार, सरकार को अब हरकत में आने की जरूरत है। सरकार को महिलाओं को वर्कफोर्स से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। छोटे संस्थानों को टैक्स लाभ या विशेष छूट से उनकी समस्या को कम किया जा सकता है।

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