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Saturday, 12 January 2019

बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं,खुद दे रही अव्यवस्थाओं की गवाह

हरपालपुर में दम तोड़ रही स्वास्थ्य सेवाएं
हरपालपुर।हरदोई – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर में अव्यवस्थओं के चलते स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही है।हालात इतने बदतर है कि यहां एक महिला डॉक्टर की तैनाती तो की गई है लेकिन अभी तक उनके दर्शन तक नही हुए हैं।एक दाई द्वारा प्रसव कराए जाते रहे है लेकिन वह भी अब सेवानिवृत्त हो गयी है।यदि देर शाम या रात्रि में कोई प्रसव होता है तो टार्च या लालटेन की रोशनी के सहारे होते है क्योंकि यहां जनरेटर तो लगे हैं लेकिन वह केवल पोलियो अभियान के समय वैक्सीन की वजह से ही चलाये जाते हैं। लेकिन सवाल इस बात का है कि जब जनरेटर चलाया नही जाता तो आखिरकार प्रतिमाह हजारों रुपये डीजल के नाम पर खर्च कैसे हो रहे हैं। केंद्र में तैनात डॉक्टर यहां रुकते ही नहीं है इतना ही नहीं, डॉक्टरों ने खुद के आवंटित आवासों में प्राइवेट लोगों को निवास करने की छूट दे रखी है।
*नही रुकते हैं डॉक्टर,प्राइवेट लोग आवास में करते निवास*सामुदायिक केंद्र में वेसे तो 6 डॉक्टर तैनात हैं लेकिन महीने में दो तीन बार ही आते हैं और कुछ देर बाद ही यहां से भाग जाते है। हालांकि इन डॉक्टरों के लिए अस्पताल परिसर में आवास आवंटित है जिनमे प्राइवेट लोग रह रहे हैं। डॉक्टरों के अभाव में यहां आने वाले मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पाता है और मजबूरन मरीजो को जिला अस्पताल या प्राइवेट डॉक्टर की शरण मे जाना पड़ता है।*नहीं है महिला चिकिसक व बाल रोग विशेषज्ञ*सामुदायिक केंद्र पर कोई भी महिला चिकित्सक व बाल रोग विशेषज्ञ भी नही है जिसके कारण महिलाओं को इलाज के लिए भटकना पड़ता है।सबसे ज्यादा समस्या गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है उनका प्रसव एक दाई के द्वारा कराया जाता है।बाल रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से नवजात को उचित इलाज नहीं मिल पाता है।कहने को तो यहां भारी भरकम जनरेटर लगा हुआ है जो सही दशा में है लेकिन वर्षों से उसे चलाया नही गया है।इसके लिए डीजल के नाम पर प्रतिमाह हजारों का चूना लगाया जा रहा है।*मोमबत्ती और लालटेन की रोशनी में प्रसव*कहने को तो यहां चार जरनेटर है लेकिन चलता कोई नहीं है जब लाइट चली जाती है तो सभी उपकरण सिर्फ शो पीस बन जाते है। यहां तक कि यदि रात में कोई प्रसव बिजलीं न होने की दशा में होते हैं तो उसके लिए मोमबत्ती या लालटेन की रोशनी का सहारा लिया जाता है।*शुद्ध पेयजल का संकट*करोड़ों का अस्पताल लेकिन सुविधाएं न के बराबर है,मरीजों और तीमारदारों को शुद्ध पेयजल भी यहां नहीं मिल पाता है। हालांकि यहां पानी की टँकी बनी हुई है लेकिन वो खुद पानी के लिए तरस रही है।वर्षो से पानी की टंकी की सफाई न होने से पानी मे गंदगी बनी हुई है। बेड तो पर्याप्त है पर वक्त पर नही मिलताहै।कोई डॉक्टर यहां प्रसव के लिए महिला वार्ड में 12 बेड, एमरजेंसी में 6 बेड और जनरल वार्ड में 12 बेड सहित 30 बेड मौजूद है।प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉक्टर आनंद पांडेय का कहना है कि अस्पताल की कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है तथा इमरजेंसी में भी डॉक्टर तैनात रहते है लेकिन अनुपस्थित रहने की शिकायत पर कार्यवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी जाती है

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