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Saturday, 4 May 2019

बलरामपुर अस्पताल में मरीज को नहीं मिला वेंटिलेटर

दस वेंटीलेटर के बावजूद अति गंभीर मरीजों को नहीं कर रहे भर्ती

लखनऊ। राजधानी के अस्पतालों में मरीजों को अब भी वेंटिलेटर के इंतजार में तड़पना पड़ रहा है या उसके अभाव में उसकी जान भी चली जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग केवल खानापूरी करके गोल मटोल जवाब देकर पल्ला झाड ले रहा है। मामला बलरामपुर अस्पताल का है जहां इलाज करवाने आ रहे मरीजों को अभी भी वेंटीलेटर की सुविधा नहीं मिल पा रही है। करोड़ों रुपए की लागत से बने आईसीयू में यूपीएचएसएसपी से चार वेंटीलेटर मिले थे। बाकी पुराने छह वेंटीलेटर हैं। बावजूद इसके अति गंभीर मरीजों को वेंटीलेटर स्पोर्ट पर भर्ती नहीं लिया जा रहा है।

वेंटीलेटर की सुविधा न होने पर मरीजों  को भेजा  इन संस्थानों पर  

अस्पताल प्रशासन का कहना है डॉक्टर व स्टॉफ की कमी से वेंटीलेटर पर 24 घंटे मरीजों की भर्ती संभव नहीं हो पा रही है। बलरामपुर अस्पताल में 776 बेड हैं, जहां रोज करीब छह से आठ हजार मरीज इलाज करवाने आते हैं। इसमें से कई ऐसे गंभीर मरीज होते हैं। जिन्हें वेंटीलेटर की जरूरत होती है। अस्पताल में पूर्व में वेंटीलेटर की सुविधा न होने पर इन मरीजों को केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान रेफर किया जाता था। जहां उन्हें वेंटीलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। इससे मरीज निजी अस्पतालों के चक्कर लगाते थे। मरीजों की इस समस्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यूपीएचएसएसपी से चार वेंटीलेटर की मांग की थी। करोड़ों रुपए की लागत से चार वेंटीलेटर अस्पताल को मार्च माह में मिलने संग इंस्ट्राल हो गए मगर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में वेंटीलेटर खाली न होने पर बलरामपुर अस्पताल भेजा 

आज दोपहर बस्ती हलुहापाल से आए हेड इंजरी के गंभीर मरीज मंटू (22) को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में वेंटीलेटर खाली न होने पर बलरामपुर अस्पताल भेजा गया। पिता शिवपुजारी का आरोप है कि दोपहर करीब एक बजे मरीज को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। जहां पर तैनात ईएमओ पहले मरीज को वेंटीलेटर न होने का हवाला देकर वापस लौटाने लगे। मामले की शिकायत अधिकारियों से करने की बात कही तो उसे इमरजेंसी में ऑक्सीजन स्पोर्ट पर भर्ती कर लिया। हालांकि शाम तक मरीज को वेंटीलेटर नहीं मुहैया कराया। ऐसे में तीमारदार मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं अफसरों का कहना है कि डॉक्टर-स्टॉफ कमी की वजह से 24 घंटे वेंटीलेटर स्पोर्ट पर मरीज को नहीं रखा सकता है।

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