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Saturday, 4 May 2019

कांग्रेसी राजनीति के चक्रव्यूह में फंसे ‘आचार्य’!

राहुल और प्रियंका ने लखनऊ चुनाव से बनायी दूरी

चुनावी माहौल में हर मोड़ पर अकेले ही संघर्ष करते दिखें आचार्य प्रमोद

लखनऊ। लखनऊ लोकसभा सीट पर आनन-फानन में कांग्रेस प्रत्याशी उतारे गये आचार्य प्रमोद कृष्णम को भले ही इस बात का काफी भान है कि उनकी राजनीतिक टक्कर बीजेपी के दिग्गज नेता और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से है, मगर हकीकत यह है उन्हीं की पार्टी का पूरा सपोर्ट उन्हें नहीं मिलता दिख रहा है।

स्थितियां यह हैं कि अकेले आचार्य लखनऊ में चंद कांग्रेसजनों को साथ लेकर फिर से यहां पर पार्टी की मौजूदगी दर्ज कराने के लिए दिनरात लगे हुए हैं। वहीं कुछ राजनीतिक जानकारों की मानें तो आचार्य को न तो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और न ही प्रदेश के दिग्गज नेताओं का सहयोग मिल पा रहा है। बता दें कि कांग्रेस के स्टार प्रचारक युवा और तेजतर्रार नेता हार्दिक पटेल पड़ोस के ही जनपद में चुनावी जनसभा में आते हैं, मगर लखनऊ से दूरी बना लेते हैं। यही नहीं स्वयं प्रियंका गांधी जब सक्रिय राजनीति में पूरी तरीके से उतरीं तो उन्होंने लखनऊ प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर काफी समय बिताये।

प्रियंका ने लखनऊ के नये-पुराने कांग्रेसजनों से भी खुलकर बात की और सभी का फीडबैक लिया। मगर जैसे ही राजधानी की सीट पर बतौर कांग्रेस कैंडीडेट आचार्य का नाम सामने आया तो एक तरह से सभी कांग्रेसी दिग्गजों ने यहां से मुंह मोड़ लिया। प्रियंका ने भी महज औपचारिकतावश एक वीडिया के माध्यम से आचार्य प्रमोद के समर्थन में अपनी बात कही और इसे भेज दिया। लखनऊ से दूरी और आचार्य से परहेज का सिलसिला यही पर नहीं थमा, यहां के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर भी इस सीट को लेकर अपेक्षाकृत उतने सक्रिय नहीं दिखे। अब जबकि छह मई को यहां पर चुनाव है, तो ऐसे में दो दिन पहले शनिवार को जब आचार्य के समर्थन में बाइक रैली निकली गई तो इनकी संख्या सीमित ही रही। जबकि प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्तागण ही यह दावा करते आ रहे थे कि कम से कम पांच हजार बाइक की रैली निकाली जायेगी।

इसके अलावा जब यहां से गठबंधन प्रत्याशी पूनम सिन्हा पर संभवत: उनके द्वारा किए गए कुछ कथित बयान को लेकर एक महिला पत्रकार ने सवाल किये तो प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड सीएम हरीश रावत की मौजूदगी में आचार्य अकेले ही संघर्ष करते दिखायी दिए। इन विकट परिस्थितियों में भी न तो पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता उनके बचाव में और न ही कांगे्रस का पक्ष रखने के लिए आगे आया। इतना ही नहीं शत्रुघ्न सिन्हा का कांग्रेस में शामिल होना और उनकी पत्नी का लखनऊ से गठबंधन प्रत्याशी बनाया जाना, इन दोनों विरोधाभास राजनीतिक परिस्थितियों का भी सामना अकेले आचार्य प्रमोद ही करते नजर आयें। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के ही कुछ विश्वस्त सूत्रों की मानें तो दरअसल, आचार्य कहीं न कहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी के राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस गए। वहीं राहुल और प्रियंका के लखनऊ चुनाव प्रचार में शामिल नहीं होने के सवाल पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह का कहना है कि प्रियंका जी ने वीडियो के जरिये समर्थन की अपील की है और तमाम नेतागण यहां आते गए, ऐसी कोई बात नहीं है।

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