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Monday, 3 June 2019

राम नाम की लूट

 बाल मुकुन्द ओझा

इस समय हमारे देश में गरीबी और भूख से ज्यादा चर्चा राम नाम की हो रही है। ऐसे लगता है जैसे राम नाम की लूट मची है। श्री राम हमारे आराध्य है इसमें दो राय नहीं है। हमारे घर घर में रामायण और गीता मिल जाएगी। मगर जिसकी चर्चा होनी चाहिए वह नहीं हो रही है और उस तरफ से हमने आंखे मूँद ली है। देश में आज भी दो वर्ग है एक अमीर और दूसरा गरीब। साठ के दशक में गरीबी हटाने के लिए लोग सड़कों पर उत्तर कर संघर्ष करते थे। संसद में भी गरीबी को लेकर हंगामा बरफा करता था। अब लोहिया भी नहीं है जो कहते थे किस तरह इस देश का आम आदमी तीन आने रोज पर गुजर करता है जबकि प्रधानमंत्री के कुत्ते पर तीन आने रोज खर्च होता है और प्रधानमंत्री पर रोजाना पच्चीस हजार रुपए खर्च होता है। आज गरीबी के नारे लगाने वाले नहीं रहे है। आज सड़कों पर जय श्री राम का नारा बुलंद हो रहा है। कितना बदलाव देश में आ गया है। जैसे गरीबी दूर हो गई है।

सच तो यह है आजादी के 73 वर्षों के बाद भी देश से गरीबी दूर नहीं हुई। भूखे पेट सोने वालों की कमी नहीं हुई। मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में गरीबी उन्मूलन की कुछ योजनाएं चलाई मगर उससे कितनी गरीबी दूर हुई यह शोध का विषय है। हाँ यह सही है की घर घर में रसोई के कनेकशन दिए गए जिससे कुछ हद तक धुंए की परेशानी से महिलाओं का पीछा छूटा। शौचालय भी निर्मित हुए जिससे बाहर शौच जाने की मुसीबत से पीछा छूटा। योजनाएं तो अच्छी थी क्रियान्वयन में गड़बड़ी हो सकती है। मगर यहाँ चर्चा राम नाम की चल रही है। राम नाम ममता दीदी को अच्छा नहीं लगता ऐसा भी नहीं है। मगर राम नाम में हो रही सियासत से दीदी परेशान है। भाजपा राम नाम की बेतरणी से सत्ता का स्वाद चखने की तैयारी में है। अब ममता दीदी से कौन पूछे भई इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है। सारे वामपंथी तो ममता के साथ आ गए जिन्हें राम नाम से एलर्जी है। अब ये वामपंथी धीरे धीरे ममता छोड़ रहे है तो ममता का बिगड़ना जरुरी है और इसका गुस्सा जय श्रीराम पर निकालना सही नहीं है।

भूख और गरीबी अभी भी हमारे लिए नासूर बने है। आज जरुरत इस बात की है की हम गरीबी के दल दल से देश को निकाल कर दो जून रोटी का जुगाड़ करें। आज तो रोटी ,कपडा और मकान के लिए सड़कों पर आकर लड़ाई लड़ने वालों की जमात भी नहीं रही। इन भूखे नंगों की आवाज कौन उठाये। राम नाम जपने से भूख दूर नहीं होगा। हम राम नाम की माला जरूर फेरे मगर देश को भूख और गरीबी से निजात दिलाने के लिए भी अपनी ताकत झोंके।

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