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Friday, 11 May 2018

कृषि रोगों के नियन्त्रण के लिए अचूक है बीजशोधन व भूमिशोधन

बहराइच। जिला कृषि रक्षा अधिकारी राम दरश वर्मा ने जिले के कृषकों को सलाह दी है कि आगामी खरीफ फसल में बेहतर उत्पादन के लिए बीजशोधन व भूमिशोधन अवश्य करें। बीज जनित व भूमि जनित रोगों से फसलों के बचाव के लिए बीजशोधन व भूमिशोधन का अत्याधिक महत्व है। बीज तथा भूमिशोधन को अपनाकर कृषक अपनी फसल को रोगों से सुरक्षित रख कर अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। बीज शोधन के अभाव में फसलों में कई फफूंदजनित जीवाणुजनित रोगों का प्रकोप देखा जाता है। उन्होंने बताया कि रोगकारक फफूंद व जीवाणु प्रायः बीज से लिपटे रहते हैं या भूमि में पड़े रहते हैं। बीज को बो देने के बाद फफूंदी अपने स्वभाव के अनुसार नमी प्राप्त होते ही उगते बीज अंकुर या पौधों के विभिन्न भागों को संक्रमित करके रोग उत्पन्न करते हैं। ऐसे रोगों से बचाव के लिए बीज उपचार बीजशोधन ही एक मात्र सरल सस्ता व सुरक्षात्मक उपाय है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को सुझाव दिया है कि बीजशोधन के लिए फफूंदनाशक रसायनों थीरम 75 प्रति अथवा कार्बण्डाजिम 50 प्रति अथवा कार्बाक्सिन 37.5 प्रति को 2 से 3 ग्राम रसायन प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से एवं बायोपेस्टीसाइड जैसे ट्राईकोडर्मा हारजेनियम 4 ग्राम प्रति कि.ग्रा. अथवा सूडोमोनास 10 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित कर बुवाई करना चाहिए। श्री वर्मा ने बताया कि धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग में पत्तियाॅ नोक से अथवा किनारे से सूख जाती हैं।

सूखे हुए किनारे अनियमित एवं टेढ़े मेढे़ हो जाते हैं जिससे बचाव के लिए स्टेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत एवं टेट्रा साइक्लीन 10 प्रतिशत की 4 ग्राम मात्रा 25 कि.ग्रा. बीज की दर से बीजशोधन कर बुवाई करना चाहिए। उन्होंने बताया कि झौका रोग में पत्तियों पर आॅख की आकृति के धब्बे बन जाते हैं जो बीच में राख के रंग के तथा किनारे पर गहरे कत्थई रंग के होते हैं। इनके अतिरिक्त बालियों डण्ठलों पर भी काले व भूरे धब्बे बन जाते हैं इससे बचाव के लिए बोने से पूर्व बीज को 3 ग्राम थीरम अथवा 2 ग्राम कार्बण्डाजिम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीजशोधन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि बीज शोधन के लिए कृषि रक्षा रसायन थीरम कार्बण्डाजिम ट्राईकोडर्मा हारजेनियम स्टेप्टोमाइसिन सल्फेट आदि जनपद की सभी कृषि रक्षा इकाईयों पर 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध है।

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