बहराइच। भूमिजनित रोगो से फसलों की सुरक्षा के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी राम दरश वर्मा ने बताया कि अनेक कीटों की प्रावस्थाएं व भूमिजनित रोगो के कारक भूमि में पाये जाते हैं जो फसलो को विभिन्न प्रकार से क्षति पहुंचाते हैं। उन्हांने बताया कि प्रमुख रूप से दीमक सफेद गिडार कटवर्म सूत्रकृमि लेपिडाप्टेरस आदि अनेक कीटों तथा फफूॅदी जीवाणु रोगों के भी जनित कारक प्रावस्थाएं भूमि की संरचना के अनुरूप मिट्टी मे पाये जाते हैं जो अनुकूल परिस्थितियों में पौधे की विभिन्न प्रावस्थाओं को संक्रमित कर फसल उत्पादन में बाधक बन हानि पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि कीट व्याधियों के रोकथाम के लिए कृषि रक्षा रसायनों का आवश्यकतानुसार प्रयोग करना पड़ता है। फलस्वरूप अधिक व्यय के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि हो जाती है। उन्होने बताया कि बीज बोने व पौध रोपण के पूर्व समय से संस्तुत कृषि रक्षा रसायनों तथा जैविक रसायनों (बायोपेस्टीसाइड) से भूमिशोधन द्वारा संभावित क्षति प्रारम्भ में ही रोककर स्वस्थ फसल से गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त होगा तथा उत्पादन लागत भी कम होगी।
भूमि शोधन हेतु कृषि रक्षा रसायानों जैसे क्लोरपायरीफाॅस 20 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से एवं बायोपेस्टीसाइड जैसे ट्राइकोडर्मा अथवा व्यूबेरिया बेसियाना अथवा सूडोमोनास 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद में मिलाकर भूमि उपचारित करना चाहिए। जिससे भूमिजनित रोग जैसे जीवाणु झुलसा पत्तीधारी रोग उकठा जड़/तना सड़न वैक्टीरियल बिल्ट एवं डाउनी मिल्डयू आदि से बचा जा सकता है। उन्होंने किसान भाईयों से अपील की है कि किसी भी फसल ने कीट रोग के प्रकोप की दशा में जिला कृषि रक्षा अधिकारी के दूरभाष नम्बर 9839206867 पर सम्पर्क कर कीट रोग के नियन्त्रण के सम्बन्ध में सलाह प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कीट रोग से बचाव हेतु आवश्यक कृषि रक्षा रसायन जनपद के सभी कृषि रक्षा इकाईयों पर अनुदानित मूल्य पर उपलब्ध है। अनुदान सीमित होने के कारण प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि कृषि रक्षा रसायन प्राप्त कर कीट रोगों से अपनी फसल का बचाव उपचार करते हुए अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

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