चिलकहर (बलिया)- वर्षा न होने किसान संकट में दिख रहा है व पेशानियों पर बल पड़ता दिख रहा है व भविष्य को लेकर चिंतित सा दिख रहा है। हालात यह है कि बहुतेरे किसान इस बार खेती व धान की रोपनी की बात पुछने पर चुप सा हो जा रहे है।
नहर किनारे के दोनो तरफ वीरपुरा से लेकर बुढ़ऊ तक के पांच एकड़ जमीनो को छोड़ दिया जाय तो शेष किसान हतोत्साहित सा लग रहा है खेतो की रोपनी करने के लिये महंगे धान के बीज लेकर नर्सरी तैयार कर निगाह लगाये बैठे थे कि जब 15 जून के बाद बारिस शुरु हो तो खेतो मे रोपाई कार्य शुरु किया जाय|
परन्तु 15 जुलाई व्यतित होने को है व बारिश न होने से खेतो मे आषाढ़ के महीने मे धूल उड़ रही है तो वहीं जिन किसानो ने निजी संसाधनो से कुछ रोपाई कार्य किये है उनकी फसल सुख रही है किसान शेषनाथ सिंह का कहना है कि अबतक ऐसा नही हुआ था एक बार बारिस हो जाने पर सुखा पड़ता था पर इस बार तो भगवान किसान को अकाल की तरफ पहुचा दिये है वहीं बलवन्त यादव ने कहा कि बर्षा अगर एक सप्ताह नही हुई तो धान की फसल किसी हालात मे नही हो सकती किसान विकास सिंह, रामेश्वर चौधरी, मुन्नीलाल पासवान, तिलकधारी पान्डेय सबके हालात एक जैसे ही है वहीं कोड़रा से लेकर मटिही, कुरेजी, रामपुर, छिब्बी, रतसी, बीराभांटी, गढ़मलपुर सबके हालात एक जैसे ही है किसान ईश्वरीय आक्रोश से भयाक्रान्त है तो वहीं अब ग्रामीणो के टोटके भी किये जा रहे है तो महिलाये डीह बाबा से लेकर देवी देवताओ की गुहार लगाती दिख रही है कुलमिलाकर वर्षा न होने की दशा मे किसान व किसानी तबाह होती दिख रही है।


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