लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के ने रायबरेली रेल हादसे पर दुख व्यक्त किया है। साथ ही कहा कि मोदी सरकार की लापरवाही से देश में रेल हादसां की बाढ़ आ गई है पर सरकार मंदिर-मस्जिद मसले में उलझी है। पार्टी ने केंद्रीय रेल मंत्री की ओर से घोषित किए गए मुआवजे को नाकाफी बताया और मृतक आश्रितों को 50-50 लाख, गम्भीर घायलों को 5-5 लाख और घायलों को 2-2 लाख रूपये का मुआवजा देने की मांग की।
रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने रायबरेली हादसे पर दुःख जताते हुए कहा कि पूर्व की दुर्घटनाओं से यदि रेल मंत्रालय ने सबक लेकर सुरक्षा के प्रबन्ध किये होते तो आज दुर्घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि केन्द्र में भाजपा सरकार आने के बाद रेल दुघर्टनाओं में बाढ़ सी आ गयी है और रेल मंत्रालय हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रेल घटनाएं रेलवे विभाग की बदइंतजामी का परिणाम है।जनता को बुलेट ट्रेन का ख्वाब दिखाने वाले लोग अपने देश में फैली हुयी रेल लाइनों के रखरखाव में नाकाम साबित हो चुके हैं।
जनता को भगवान के भरोसे छोडा : दुबे
राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री दुबे ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में रेल भाड़ा बढाने में कोई भी कसर नहीं छोडी पर जनता को सुविधाएं देने के नाम पर मंत्रालय शून्य रहा। वास्तविकता यह है कि अपने कार्यकाल में पुरानी जर्जर रेल की पटरियों को भी बदलने का कार्य प्रभावी ढंग से कराने में सरकार लापरवाह साबित हुयी है। उन्होंने कहा कि यदि बढे हुये रेल किराये की धनराशि को ही रखरखाव में खर्च किया जाता तो भी स्थिति बेहतर हो सकती थी, लेकिन यह सरकार केवल मन्दिर मस्जिद के नाम पर सम्प्रदायिक भावनाएं भड़काने में व्यस्त रही और देश की जनता को भगवान के भरोसे छोड दिया।
उन्होंने रेल हादसे में मारे गये लोगों के परिजनों को 50-50 लाख रूपये तथा गम्भीर घायलों को 5-5 लाख रूपये और घायलों को 2-2 लाख रूपये का मुआवजा देने की मांग करते हुये कहा कि सरकार द्वारा घोषित मुआवजा बहुत ही कम है। रेल मंत्रालय की लापरवाही के चलते हुयी इस दुर्घटना में मुआवजा बढाकर घोषित किया जाय।

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