राजेश माहेश्वरी
श्रीलंका, एक ऐसा देश जो तो बहुत छोटा, लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य और कला संस्कृति से भरा हुआ देश है। यहां के मंदिर, बड़े चाय बागान, पहाड़ और समुद्री बीच पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। भारत से बाहर जाकर भी जिन देशों में बिलकुल भारत जैसा ही व्यवहार और एहसास मिलता है उनमें एक है श्रीलंका। करीब एक सप्ताह तक श्रीलंका भ्रमण का मेरा निजी अनुभव यही है। मैं आईएफडब्ल्यूजे प्रतिनिधि दल का हिस्सा था।
श्रीलंका प्रेस एसोसिएशन (एसएलपीए) के निमंत्रण पर भारत के पत्रकारों के 18 सदस्यीय दल पिछले दिनों श्रीलंका की यात्रा पर था। वहां जाकर मैंने श्रीलंका की संस्कृति, लोक व्यवहार, नागरिक अनुशासन, प्राकृतिक सुंदरता और वहां की प्राचीन धरोहरों के देखकर, छूकर भारत और श्रीलंका दोनों देश के परस्पर संबंधों और निकटता का महसूस किया। और जितना मैंने श्रीलंका के बारे में पढ़ा व सुना था, उससे अधिक वहां जाकर मैंने पाया। पर्यटन के लिहाज से अहम देश जिसके क्रिकेट खिलाड़ियों से पूरी दुनिया थर्राती है। प्राचीन काल में श्रीलंका का नाम ताम्रपर्णी हुआ करता था. लेकिन भारत के इस अभिन्न अंग पर सन 1505 में पुर्तगाली, 1606 में डच और 1795 में अंग्रेजों ने अपना अधिकार जमा लिया। आखिरकार साल 1935 में अंग्रेजों ने लंका को भारत से अलग कर दिया। हालांकि यहां आज भी भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिल ही जाती है।
श्रीलंका देश, 1972 तक इसका नाम सीलोन था, जिसे 1972 में बदलकर लंका तथा 1978 में इसके आगे सम्मानसूचक शब्द “श्री” जोड़कर श्रीलंका कर दिया गया। यह देश एक बहुजातीय तथा बहुधार्मिक है। भारत के दक्षिण में बसा पड़ोसी देश श्रीलंका पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। श्रीलंका की प्राकृतिक खूबसूरती और यहां की संस्कृति के साथ ऐसी कई बातें हैं जो आपको इस देश की यात्रा करने के लिए प्रेरित करती हैं। श्रीलंका की आबादी दो करोड़ की है जहां के लोग शिक्षा और व्यवसाय में एशिया के देशों में खास स्थान रखते हैं। यहां की आबादी की 70 फीसदी लोग बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं। बाकी धर्मों में 12 प्रतिशत हिंदू, 9 प्रतिशत मुस्लिम लोग भी हैं जबकि 7 प्रतिशत क्रिश्चियन हैं।
वास्तव में श्रीलंका का नाम जेहन में आते ही पहलेपहल हमारे सामने लंका दहन का दृश्य घूमने लगता है। हनुमान लंका दहन करने के बाद लंका के ऊपर से उड़े जले जा रहे हैं। श्रीलंका वैसे तो क्षेत्रफल के लिहाज से एक छोटा देश है, मगर यह देश सांस्कृतिक और आध्यात्मिक तौर पर बेहद सजग देश है। बुद्ध के दर्शन, तमिल और सिंहली राजनीति के इर्द-गिर्द घूमने वाला यह देश सांस्कृतिक रूप से बेहद सजग और समृद्ध है। रामायण में जिस भूभाग को लंका अथवा लंकापुरी कहा गया है, वह स्थान आज का श्रीलंका देश है। 70 फीसदी बौद्ध आबादी वाले इस देश के लोग बेहद धार्मिक होते हैं। कथारगमा नाम के उत्सव में स्थानीय निवासी जीभ या त्वचा में सुइयां चुभाकर अपने शरीर को कष्ट देकर अपनी गलतियों का प्रायश्चित करते हैं। वहीं पूर्णिमा के दिन यहां लोगों को अवकाश मिलता है यानि इनके लिए पूजा-पाठ के लिए भी छुट्टी होती है।
त्रेतायुग में श्रीमहाविष्णुजी ने श्रीरामावतार धारण किया तथा लंकापुरी जाकर रावणादि असुरों का नाश किया। इस स्थान पर युगों-युगों से हिन्दू संस्कृति ही थी। 23 सहस्र 300 वर्ष पूर्व राजा अशोक की सुपुत्री संघमित्रा के कारण श्रीलंका में बौद्ध पंथ का प्रवेश हुआ। आज वहां के 70 प्रतिशत लोग बौद्ध हैं। ऐसा होते हुए भी श्रीलंका में श्रीराम, सीता तथा लक्ष्मण से संबंधित अनेक स्थान हैं। वाल्मिकी रामायण में महर्षि वाल्मिकी ने जो लिखा, उसके अनुसार ही आगे घटित हुआ, इसके श्रीलंका में अनेक प्रमाण मिलते हैं। श्रीलंका में श्रीराम, सीता, हनुमानजी, लक्ष्मण, रावण तथा मंदोदरी से संबंधित अनेक स्थान, तीर्थ, गुफाएं, पर्वत तथा मंदिर हैं।
चारों तरफ हिंद महासागर से घिरे इस छोटे से द्वीप के भारत के साथ सांस्कृतिक रिश्ते कब से चले आ रहे हैं, इसका ठीक-ठीक अंदाजा लगा पाना बहुत मुश्किल है। मूंगे और पन्ने की चट्टानों वाला यह देश जितना सुंदर है, उतना ही जीवंत भी। शायद यही वजह है जो सुनामी की तबाही के बाद बमुश्किल एक साल के भीतर ही वहां जिंदगी अपनी पुरानी रवानी में आ गई। खास तौर से भारतीय पर्यटकों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी सांस्कृतिक बुनावट बिलकुल वैसी ही है जैसी भारत की, कई धर्म, संप्रदाय, जाति और परंपराओं से मिलकर बनी हुई। फिर भी भारत में ही जन्मे बौद्ध धर्म का प्रभाव यहां सबसे अधिक है। वैविध्यपूर्ण संस्कृति और सभ्यता वाले इस देश में आपके लिए वह सब कुछ है जिसकी चाहत एक पर्यटक को हो सकती है। खानपान में स्वादिष्ट व्यंजनों से लेकर खरीदारी के लिए कीमती रत्न, जेवरात, तरह-तरह के वन्यजीवों से भरे राष्ट्रीय पार्क, सुंदर समुद्रतट, रोमांचप्रेमियों के लिए पर्यटन से जुड़े कई खेल और आस्थावान लोगों के लिए मंदिर व मस्जिद के अलावा इस छोटे से द्वीप में सैर-सपाटे का पूरा खजाना उपलब्ध है।
श्रीलंका में भ्रमण करते कहीं ऐसा नहीं लगता कि हम भारत से बाहर हैं। घर-द्वार, आंगन-चैगान, खेत-वन, पर्वत-नदी, समुद्र-पेड़-पौधे, हाथी-घोड़े, चिड़ी-चिड़कली, रेल-मोटर, सड़क-पगडंडी, मंदिर-मूर्ति सब कुछ, बहुत कुछ भारत जैसा ही है। वट वृक्षों के समूह, बोधिवृक्षों (पीपल) का दिगंतव्यापी शाखा-प्रशाखीय विस्तार, नीमों की शीतल पर्यावरणीय विशुद्ध औषधीय प्रस्तुति भारत-श्रीलंका की समान वानस्पतिक वंशावली प्रकट करते हैं। श्रीलंका वासियों की सिधाई प्रणम्य है। सहयोग और सहकार मन को जीत लेता है। गौमाता देशी भी हैं और जरसी भी। सांझ ढले चरवाहा उसी तरह गायों-भैसों को चराकर वापस लाता है, जैसा भारत में।
श्रीलंका के नागरिक बेहद सभ्य, अनुशासित तो हैं ही वहीं जब वो किसी अजनबी से मिलते हैं तो उसका स्वागत मुस्कुरा कर करते हैं। श्रीलंकावासी ‘हां’ कहने में भारतवासियों की तरह सिर ऊपर-नीचे हिलाने के बजाय दांए-बांए हिलाते हैं. ऐसा लगता है जैसे ‘ना’ कह रहे हों। श्रीलंका के लोग सुबह के नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के भोजन में चावल और कढ़ी छक कर खाते है। श्रीलंका की साक्षरता दर 92 फीसदी है। यह पूरे दक्षिणी एशिया में सबसे अधिक है। ट्रेफिक नियमों का पालन श्रीलंका वासी बेहद अनुशासित तरीके से करते हैं।
श्रीलंका के साथ भारत के विकास सहयोग का आकार आज 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर है। और इसका एकमात्र उद्देश्य श्रीलंका को अपने लोगों के लिए शांतिपूर्ण, समृद्ध एवं सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने में मदद करना है। क्योंकि श्रीलंका के लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति का संबंध 1.25 अरब भारतीयों से जुड़ा है। क्योंकि चाहे स्थल हो अथवा हिंद महासागर का जल, दोनों जगह हमारे समाज की सुरक्षा अविभाज्य है। भारत और श्रीलंका के रिश्तों में सबसे बड़ी अड़चन तमिल उग्रवादियों का संघर्ष और उनका दमन रहा है।
श्रीलंका ने पूर्वोत्तर श्रीलंका में चालीस हजार तमिल उग्रवादियों और नागरिकों को मारकर समस्या का अंत किया है और दक्षिण भारत की तमिल पार्टियां उसे नरसंहार कहती हैं जबकि भारत सरकार अपनी खामोशी और राजनय से उस घाव को भरने की कोशिश कर रही है। लिट्टे प्रमुख के मारे जाने के बाद से श्रीलंका ने विकास की जो रफ्तार पकड़ी है, उसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा करनी चाहिए। आज त्रिंकोमाली, बट्टीकलोआ और अम्पारा जिलों की सूरत ही बदल गई है। इस इलाके को तरक्की से जोड़ने के लिए लगभग 18 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़क, 11 सौ किलोमीटर राज्य सड़क और लगभग 11 सौ किलोमीटर नेशनल हाइवे बना दिए गए। सरकार का पूरा जोर शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर है।
भारत ने श्रीलंका के उन इलाकों में पुनर्निर्माण का प्रस्ताव रखा है, जो तमिल उग्रवाद और सेना की कार्रवाई के दौरान तबाह हो गए थे। इनमें त्रिंकोमाली में तेल संग्रह का केंद्र बनाने से लेकर मन्नार-जाफना, मन्नार-त्रिंकोमाली और दांबुला-त्रिंकोमाली में सड़क बनाने का कार्यक्रम भी शामिल है। देखना है पंडित नेहरू के बाद बुद्ध के नाम पर होने वाला मोदी का नया पंचशील राजनय कितना कारगर होता है। इतना बड़ा-सुंदर वह देश मेरे मन की मंजूषा में, स्मृतियों के साथ समा गया है। हवाई जहाज ने उड़ान भर ली है। मेरे साथ ही रामकथा के स्थल-प्रसंगों को लेकर सुनहरी आभा वाला देश संग साथ चला आया है। वह कह रहा है-हमारी भूमि और हमारी संस्कृति बहुत-बहुत समान हैं। आओ साथ बैठते हैं। फिर साथ-साथ चलते हैं, नई दिशाओं की ओर।

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