जलियांवाला बाग नरसंहार को ब्रिटेन ने माना इतिहास का सबसे शर्मनाक धब्बा | Alienture हिन्दी

Breaking

Post Top Ad

X

Post Top Ad

Recommended Post Slide Out For Blogger

Wednesday, 10 April 2019

जलियांवाला बाग नरसंहार को ब्रिटेन ने माना इतिहास का सबसे शर्मनाक धब्बा

जलियांवाला बाग नरसंहार कांड की बरसी के मौके पर औपचारिक माफी की मांग को लेकर ब्रिटिश सरकार ने मंगलवार को इस पर विचार करने के लिए ‘वित्तीय मुश्किलोंÓ के तथ्य को भी ध्यान में रखने को कहा। कांड की बरसी इसी सप्ताह है। इसी बीच आज ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे ने ब्रिटिश संसद में 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार पर शोक व्यक्त करते हुए इसे ब्रिटेन-भारत इतिहास का शर्मनाक धब्बा बताया है। ब्रिटेन संसद में अपने संबोधन के दौरान पीएम टेरेसा मे ने कहा, हमें अफसोस है जो कुछ हुआ और जिसकी वजह से लोगों को त्रासदी का सामना करना पड़ा।

टेरेसा मे ने कहा, 1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार ब्रिटिश भारतीय इतिहास का शर्मनाक धब्बा है, जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जलियांवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे अतीत के इतिहास का दुखद उदाहरण है। इसके जवाब में विपक्ष की लेबर पार्टी के नेता जर्मी कॉर्बन ने मांग की कि जिन्होंने इस नरसंहार में अपनी जान गंवाई उनसे माफी मांगी जानी जाहिए। उधर, मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी ने टरीजा मे से मांग की है कि वह भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई इस घटना के लिए माफी मांगें। लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने कहा कि सरकार को इस संबंध में पूर्ण और स्पष्ट माफी मांगनी चाहिए। आपको बता दें कि इससे पहले 2013 में तत्कालीन पीएम डेविड कैमरन ने भारत दौरे पर इस त्रासदी को बेहद शर्मनाक करार दिया था। हालाकि उन्होंने भी टरीजा की तरह घटना पर माफी नहीं मांगी थी।

उधर, ब्रिटिश विदेश मंत्री मार्क फील्ड ने ‘जलियांवाला बाग नरसंहारÓ पर हाउस ऑफ कामंस परिसर के वेस्टमिंस्टर हॉल में आयोजित बहस में भाग लेते हुये कहा कि हमें उन बातों की एक सीमा रेखा खींचनी होगी जो इतिहास का ‘शर्मनाक हिस्सा’ हैं। फील्ड ने कहा कि वह ब्रिटेन के औपनिवेशिक काल को लेकर थोड़े पुरातनपंथी हैं और उन्हें बीत चुकी बातों पर माफी मांगने को लेकर हिचकिचाहट होती है।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad