केजीएमयू की पोल खोलने वाले प्रोफेसर का डिमोशन
लखनऊ। केजीएमयू की कार्यपरिषद की बैठक में केजीएमयू की पोल खोलने के आरोप में स्टिंग ऑपरेशन के दौरान फंसे केजीएमयू के एक प्रोफेसर का डिमोशन कर दिया गया है। वहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोपी पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष को क्लीन चिट दे दी गई है।
बैठक में इन दो अहम बिंदुओं के साथ कई मुद्दों पर सदस्यों ने सहमति जताई। वहीं आचार संहिता के बीच कार्य परिषद की बैठक होने की शिकायत भी तुरंत ही राज्यपाल से की गई है। 10 साल पहले हुए थे प्रोन्नत केजीएमयू के फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. संजय खत्री 10 साल पहले प्रोफेसर बनाए गए थे। डॉ. संजय का एक स्टिंग हुआ था, जिसमें वह केजीएमयू की कार्य प्रणाली पर खुलकर बोलते हुए विभागों और अफसरों की पोल खोल रहे थे। इसमें उन पर सेवा नियमावली का पालन न करने का आरोप लगा। अब कार्यपरिषद ने सजा के तौर पर उनका प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर डिमोशन कर दिया है। जानकारी के अनुसार अगस्त 2017 में डॉ. खत्री का स्टिंग ऑपरेशन हुआ था। उन्होंने जुलाई 2017 में ट्रॉमा सेंटर में लगी आग को साजिश बताते हुए फाइलों समेत सबूत मिटाने का आरोप केजीएमयू प्रशासन के खिलाफ लगाया था। इसे केजीएमयू प्रशासन से अनुशासनहीनता माना।
मामले की शिकायत राज्यपाल से
केजीएमयू के पूर्व कुलपति डॉ. सरोज चूड़ामणि ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की वीडियोग्राफी कराई थी। जिसमें रेस्परेटरी एंड पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सूर्यकांत प्राइवेट प्रैक्टिस में फंस गए थे। तब से उनके खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस की जांच चल रही थी। अब कार्य परिषद ने उन्हें प्राइवेट प्रैक्टिस का आरोपी नहीं माना है और आरोपी से बरी कर दिया है।
केजीएमयू में आज कार्यपरिषद की बैठक पर सवाल करते हुए कुलाधिपति राज्यपाल से मामले की शिकायत की गई है। इसमें कहा गया है कि आचार संहिता लागू होने के बाद भी कार्यपरिषद की बैठक हुई और कई फैसले लेना बहुत ही गलत है। केजीएमयू के प्रोफेसर ने राजभवन में शिकायत की है।

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