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Sunday, 26 May 2019

पीएम मोदी के राजदरबार में कौन-कौन!

शाह को अहम मंत्रालय, राजनाथ का कद घट सकता है

सिन्हा की होगी वापसी, साक्षी महाराज व कौशल भी बनें दावेदार

रवि गुप्ता/नीरज अवस्थी

तरुणमित्र। 21वीं सदी की सबसे बड़ी राजनीतिक जीत के सूत्रधार मोदी दोबारा देश के प्रधान मुखिया की कुर्सी संभालने जा रहे हैं। इससे जुड़ी लगभग सारी औपचारिकतायें पूरी कर ली गर्इं हैं…अब केवल नरेंद्र दामोदार दास मोदी का राजतिलक होना है जिसके लिये शासन-प्रशासन व पार्टी स्तर पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। अभी से पीएमओ यानी प्रधानमंत्री कार्यालय में मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने वाले देश-प्रदेश व विदेश के खास मेहमानों की लिस्ट बनायी जा रही है। लेकिन इसी बीच राजनीतिक गलियारे में इस बात को लेकर भी चर्चायें होने लगी हैं, कि आखिर पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में किस-किस को जगह मिलेगी…मोदी के राजदरबार में किसको दोबारा मौका मिलेगा या फिर किसे पहली इंट्री मिलेगी।
गौर हो कि 17वीं लोकसभा के गठन के मद्देनजर हुए इस चुनाव में पिछली बार की अपेक्षा बीजेपी नीत गठबंधन यानी एनडीए को और जबरदस्त कामयाबी मिली है। उसमें भी कई ऐसे राज्य हैं जहां पर बीजेपी व उसके सहयोगी दलों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। यही नहीं कई मंत्रीगण, निवर्तमान सांसद जिन्हें दोबारा मौका दिया गया, ऐसे में वो भी चुनाव जीतकर मोदी मंत्रिमंडल में अपनी दावेदारी पेश करते नजर आ रहे हैं। वहीं पहले दिवंगत मनोहर पर्रिकर और अनंत देव के बाद उनके रिक्त स्थान को भरने और अभी सुषमा स्वराज व संभवत: अरूण जेटली के राजनीतिक संन्यास ले लेने के पश्चात मोदी-शाह को इन मजबूत नेताओं का विकल्प ढूंढने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा मोदी के पहले कैबिनेट का मजबूत हिस्सा रहें गडकरी, पीयूष गोयल, सुरेश प्रभु समेत अन्य राज्यों के क्षत्रप नेताओं को दोबारा नये सिरे से बनने वाले मंत्रिमंडल में कहां और किस स्थान पर फिट बैठाना है…यह भी काफी रोचक होगा।
पहले यूपी पर ही गौर करें तो राजनाथ सिंह ने अटल जी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए दोबारा लखनऊ सीट पर विजय पताका फहराया। राजनाथ का कद बीजेपी में शीर्ष नेताओं में गिना जाता है, मगर पार्टी सूत्रों की ही मानें तो इस बार संभवत: उनके खाते में गृह मंत्रालय न आये क्योंकि मोदी के सिपेहसलार के रूप में माने जाने वाले अमित भाई शाह पहली बार गांधीनगर सीट से लोकसभा चुनाव जीते हैं और उनके तेवर व संगठन पर पकड़ को देखते हुए उन्हें यह मौका दिया जा सकता है। हालांकि मोदी-शाह कभी भी राजनाथ को किसी भी स्तर से दरकिनार करने का जोखिम नहीं उठायेंगे, क्योंकि यूपी में राजनाथ सिंह की बड़ी ‘पॉलीटिकल लॉबी’ एक खास समुदाय के बीच है। वहीं उनके दोनों बेटे विधायक पंकज सिंह व नीरज भी पार्टी से जुड़ी गतिविधियों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते दिखायी देते हैं।
लखनऊ से सटे मोहनलालगंज सुरक्षित सीट पर कौशल किशोर ने दोबारा जीत हासिल की है। चर्चा है कि बीजेपी दिल्ली की राजनीति से अलग होकर कांग्रेस गए दलित नेता डॉ. उदित राज की खाली स्थान को भरने के लिए कौशल को मोदी मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री का कार्यभार दिया जा सकता है। वहीं उन्नाव से रिकार्ड वोटों से जीतने वाले तेजतर्रार नेता साक्षी महाराज भी मंत्री पद पाने के लिए लगातार जोर-आजमाइश करते दिख रहें। मुलायम कुनबा के मजबूत किले को ढहाकर सुब्रत पाठक ने जिस तरीके से इत्रनगरी यानी कन्नौज सीट पर अखिलेश की पत्नी व सांसद रहीं डिंपल यादव को शिकस्त दी है, तो उनकी भी दावेदारी तगड़ी है। यूपी से मंत्रियों में फेहरिस्त में पुराने नेता संतोष गंगवार, वीरेंद्र सिंह मस्त का भी नाम लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे ही योगी सरकार के जिन दो मंत्रियों डॉ. एसपी सिंह बघेल व कानपुर सीट पर सत्यदेव पचौरी ने जिस तरह से अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात दी है, तो इन्हें मोदी मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री का दर्जा मिल सकता है। उसमें भी पचौरी ने कानपुर से दिग्गज कांग्रेसी नेता श्रीप्रकाश जायसवाल को हराया है।
वहीं पूर्वांचल में गाजीपुर सीट से चुनाव हारने के बावजूद मनोज सिन्हा को मोदी के राजदरबार में किसी न किसी तरह शामिल करने की जुगत लगायी जा रही है। चुनावी पराजय के बावजूद सिन्हा की मोदी-शाह के बीच ऐसी इमेज बनी है कि जिसने बंदूक नहीं बल्कि विकास की राजनीति को पूर्वांचल में बढ़ाने का काम किया है।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की अप्रत्याशित जीत के बाद दोबारा आसनसोल से चुने गये बाबुल सुप्रियो और अन्य एक और किसी बडेÞ नेता को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। वैसे भी सुप्रिया पहले ही मोदी के मंत्रियों की टीम का हिस्सा रहे हैं। मध्य प्रदेश से सबसे बड़ा नाम कैलाश विजयवर्गीय का नाम चल रहा है जिनके नाम पर कोई संशय नहीं है। इसी तरह राजस्थान से राज्यवर्धन सिंह राठौड़ तो पहले भी केंद्रीय मंत्रिमंडल का बड़ा चेहरा रहें, अब जीत के बाद उन्हें फिर से जगह मिलना तय है।
बिहार को देखें तो मोदी-नीतीश की जोड़ी ने कमाल किया है। पटना साहिब से विजयश्री हासिल करने वाले बीजेपी के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद ने जिस तरह से पार्टी के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने वाले शत्रुघ्न सिन्हा को शिकस्त दी है, तो उनकी स्थिति काफी मजबूत है। वैसे पहले भी प्रसाद मोदी कैबिनेट का हिस्सा तो रहे ही, बल्कि बतौर प्रवक्ता मीडिया के समक्ष पार्टी का पक्ष बहुत ही बुद्धिमत्ता से रखते रहें। हिमाचल प्रदेश से अनुराग ठाकुर और पंजाब से हरसिमरत कौर की मोदी टीम में इंट्री तकरीबन तय है। वहीं पंजाब के गुरदासपुर सीट पर अभिनेता सनी देओल भले ही अपनी लोकप्रियता और मोदी लहर में चुनाव जीत गये हों, मगर अभी उन्हें मोदी टीम का भरोसा जीतना बाकी है।
वहीं दिल्ली को देखें तो सात सीटों पर बीजेपी की फतेह के बाद पुराने नेताओं में रमेश विधूड़ी और नये में हंसराज हंस के नाम चर्चा में हैं। जबकि प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी भी चुनाव जीते हैं, मगर पार्टी जानकारों की मानें तो बीजेपी संभवत: उन्हें वहां आगे बतौर सीएम का चेहरा प्रोजेक्ट कर सकती है क्योंकि पूर्वांचल व बिहारियों की अच्छी-खासी आबादी दिल्ली में हैं जिन पर भोजपुरिया गायक व अभिनेता की मजबूत पकड़ है। जम्मू-कश्मीर को देखें तो यहां बीजेपी के सूत्रधार के तौर पर काम करने वाले राम माधव और डॉ. जितेंद्र सिंह का मंत्री बनना तय माना जा रहा है, जबकि इससे पहले जितेंद्र सिंह पीएमओ में बतौर राज्य मंत्री कार्य कर चुके हैं। वहीं झारखंड के हजारीबाग से दोबारा चुनाव जीते जयंत सिन्हा फिर से मंत्री पद हासिल कर सकते हैं।

इसी तरह पूर्वोत्तर को साधे रहने के लिए फिर से किरण रिजुजू समेत एक-दो और नये सांसदों को मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं दक्षिण भारत से भी एनडीए के सहयोगी दलों को मोदी मंत्रिमंडल में किसी न किसी तरह शामिल किया जा सकता है। जम्मू-कश्मीर को देखें तो यहां बीजेपी के सूत्रधार के तौर पर काम करने वाले राम माधव और डॉ. जितेंद्र सिंह का मंत्री बनना तय माना जा रहा है, जबकि इससे पहले जितेंद्र सिंह पीएमओ में बतौर राज्य मंत्री कार्य कर चुके हैं। वहीं झारखंड के हजारीबाग से दोबारा चुनाव जीते जयंत सिन्हा फिर से मंत्री पद हासिल कर सकते हैं। इसी तरह पूर्वोत्तर को साधे रहने के लिए फिर से किरण रिजुजू समेत एक-दो और नये सांसदों को मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं दक्षिण भारत से भी एनडीए के सहयोगी दलों को मोदी मंत्रिमंडल में किसी न किसी तरह शामिल किया जा सकता है।

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