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Saturday, 18 May 2019

संकट में है सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन आयल कार्पोरेशन

नयी दिल्ली: जेट एयरवेज के धराशायी होने से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन आयल कार्पोरेशन की विमान ईंधन की मांग अप्रैल महीने में घट गई। हालांकि, बाद में इसमें सुधार आ गया और अब यह पुराने स्तर पर लौट आई है। इंडियन आयल कार्पोरेशन (आईओसी) के निदशेक (विपणन) गुरमीत सिंह ने कहा कि जेट एयरवेज को 85 प्रतिशत विमान ईंधन की आपूर्ति इंडियन आयल करता रहा है।

अप्रैल माह में जेट एयरवेज की उड़ानें एक- एक कर बंद होने की वजह से इंडियन आयल के कारोबार पर भी असर पड़ा। अप्रैल 2019 में आईओसी की विमान ईंधन मांग में करीब 10 हजार टन की कमी आई।

उल्लेखनीय है कि कर्ज बोझ तले दबी निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी जेट एयरवेज ने 17 अप्रैल को अपनी उड़ाने अस्थाई तौर पर बंद कर दीं। यह पिछले 25 साल से सेवा में थी और इसके पर 100 से अधिक विमानों का बेड़ा था।

गुरमीत सिंह ने कहा, ‘जेट एयरवेज को 75,000 टन मासिक विमान ईंधन की आपूर्ति की जाती थी। विमानन कंपनी को उसकी कुल मांग का 85 प्रतिशत आईओसी करती रही है। लेकिन अप्रैल माह में एक एक कर उसकी उड़ानें बंद होने से आईओसी की विमान ईंधन आपूर्ति करीब दस हजार टन कम रही। हालांकि, इसके बाद दूसरी विमानन कंपनियों की उड़ानें बढ़ने से इसकी भरपाई हो गई।’

जेट एयरवेज पर ईंधन आपूर्ति के बकाये के बारे में पूछे जाने पर गुरमीत सिंह ने कहा कि कंपनी पर इंडियन आयल का कोई बकाया नहीं है। करीब 1,050 करोड़ रुपये का बकाया रह गया था जिसे बैंक गारंटी भुनाकर वसूल लिया गया है।

उन्होंने बताया कि इंडियन आयल हर महीने करीब 4,00,000 टन विमान ईंधन की आपूर्ति करती है। घरेलू विमानन क्षेत्र में इंडियन आयल 68 प्रतिशत विमान ईंधन की आपूर्ति करता है जबकि अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में उसकी 46 प्रतिशत के करीब बाजार हिस्सेदारी है। जेट एयरवेज के अलावा एयर इंडिया और दूसरी विमानन कंपनियों को भी आईओसी ‘एवियशन टरबाइन फ्यूल’ (एटीएफ) की आपूर्ति करती है।

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